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“ALUMEX इंडिया 2025” प्रदर्शनी 10 से 13 सितंबर तक नई दिल्ली में

आज समुचा उत्तर भारत, अपने विस्तारित औद्योगिक केंद्रों और रणनीतिक स्थान के साथ, भारत के एल्युमीनियम एक्सट्रूज़न उद्योग का मुख्य आधार स्तंभ बन गया है। दिल्ली-NCR में तेज़ी से विकसित हो रहा औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र, राजस्थान के इंजीनियरिंग क्लस्टर, हरियाणा का ऑटोमोबाइल हब और उत्तर-प्रदेश एवं मध्य-प्रदेश में वाइब्रन्ट रियल एस्टेट सेक्टर, इस पूरे क्षेत्र को एल्युमीनियम आपूर्ति श्रृंखला का एक अनिवार्य हिस्सा बना रहे हैं। 

इस पूरे क्षेत्र में, विशेषतः बुनियादी ढांचे, निर्माण और सौर पैनल निर्माण क्षेत्रों में एल्युमीनियम एक्सट्रूज़न की खपत सबसे ज़्यादा है। उत्तर और मध्य भारत में, दिल्ली-NCR में अत्यंत तेज़ी से विकसित हो रहे रियल एस्टेट बाज़ार ने खिड़कियों, दरवाजों और पर्दे वाली दीवारों के लिए आर्किटेक्चरल (वास्तुशिल्प) प्रोफाइल की मजबूत मांग पैदा की है। इसके अलावा, हरियाणा और राजस्थान में ऑटोमोबाइल और इंजीनियरिंग हब, वाहन घटकों और औद्योगिक उपयोगों के लिए वजन में हल्के, उच्च स्तरीय चोक्सी वाले एक्सट्रूज़न को अपनाने में तेजी ला रहे हैं। 

राजस्थान के अनेक शहर-जिले, खासकर, भिवाड़ी-अलवर, जयपुर, जोधपुर, किशनगढ़, सीकर और उदयपुर में तेजी से बढ़ते औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र के कारण एक प्रमुख विनिर्माण आधार के रूप में दोहरी भूमिका निभाता है। साथ ही, अपनी रणनीतिक स्थिति के कारण यह एक प्रमुख वितरण केंद्र के रूप में, दिल्ली-NCR और उससे आगे के बाजारों में बेहतर सेवा प्रदान करता है। राज्य के लिए एक ऐतिहासिक क्षण वर्ष 2022 में आया, जब जिंदल एल्युमीनियम ने भिवाड़ी में एक एक्सट्रूज़न सुविधा का अधिग्रहण किया, जिससे प्रति वर्ष लगभग 14,000 मीट्रिक टन उत्पादन क्षमता बढ़ गई और बढ़ती मांग को पूरा करने की क्षेत्र की क्षमता और भी मजबूत हुई है।

एल्युमीनियम एक्सट्रूज़न मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ALEMAI) द्वारा आयोजित “ALUMEX इंडिया 2025” प्रदर्शनी में उत्तर और मध्य भारत के बढ़ते महत्व पर विशेष ध्यान केंद्रित किया जाएगा। भारत का पहला और एकमात्र समर्पित, एल्युमीनियम एक्सट्रूज़न प्लेटफ़ॉर्म,यह एक्सपो 10 से 13 सितंबर तक नई दिल्ली में आयोजित होगा। इस मेगा इवेंट में एल्युमीनियम मूल्य श्रृंखला के विभिन्न क्षेत्रों से 200 से अधिक प्रदर्शक और 12,000 से अधिक बिज़नेस विजीटर्स भाग लेंगे।

ALEMAI के अध्यक्ष जितेंद्र चोपड़ा ने कहा कि, “उत्तर भारत, भारत में एल्युमीनियम एक्सट्रूज़न उद्योग का सबसे बड़ा निर्माता और बाजार है। यह क्षेत्र घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय दोनों बाज़ारों की सेवा के लिए उपयुक्त है। “ALUMEX इंडिया 2025″ के माध्यम से, हमारा लक्ष्य इस उद्योग से जुड़ी उत्तर भारत की खूबियों को उजागर करना, सहयोग के अवसर पैदा करना और इस क्षेत्र के सामने आने वाली चुनौतियों का अनुकूल समाधान करना है।” 

विकास की असीम संभावनाओं के बावजूद, आज एल्युमीनियम एक्सट्रूज़न उद्योग को गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। बॉक्साइट के अपने खुद के भंडार के साथ दुनिया के तीसरे सबसे बड़े एल्युमीनियम उत्पादक होने के बावजूद, भारत में कच्चे माल की कीमतें अत्यधिक अस्थिर हैं। इस उद्योग की रीढ़, घरेलू एमएसएमई सेक्टर आज मुक्त व्यापार समझौते (FTA) में रियायतों, चीन, वियतनाम, मलेशिया, इंडोनेशिया और कंबोडिया जैसे आसियान देशों से सस्ते आयात के दबाव में संघर्ष कर रहा हैं। इसके अलावा ताज़ा अमेरिकी टैरिफ मुद्दों ने इस तनाव को और भी बढ़ा दिया है। 

घरेलू उत्पादन क्षमता का कम उपयोग, भी बड़ी चुनौती से कम नहीं है। भारत में कुल स्थापित एल्युमीनियम एक्सट्रूज़न क्षमता 3.5 मिलियन टन प्रति वर्ष होने के बावदूद, उपयोग केवल लगभग 2 मिलियन टन है तथा शेष 1.5 मिलियन टन का आयात किया जाता है। 

श्री चोपड़ा ने आगे कहा कि, “घरेलू विनिर्माण क्षमता का पूर्ण उपयोग सुनिश्चित करने के लिए नीतिगत सुरक्षा उपाय मौजूदा समय की मांग हैं। एमएसएमई को विशेष रूप से अनुचित आयात के विरुद्ध सहायता की आवश्यकता है, जिससे वे प्रतिस्पर्धी बने रह सकें। उद्योग के विकास के लिए, खुले व्यापार और स्थानीय उद्योग एवं रोज़गार की सुरक्षा के बीच संतुलन बनाए रखना बहुत आवश्यक है।” 

“ALUMEX इंडिया 2025” प्रदर्शनी, इन चुनौतियों पर चर्चा करने और आगे की राह तय करने के लिए एक बेहतर मंच प्रदान करेगी। इसमें प्रौद्योगिकी स्थानीयकरण, एमएसएमई के लिए सरकारी सहायता और वैश्विक मांग के रुझानों पर समर्पित विशेष सत्र भी आयोजित होंगे। इससे उद्योग में नवीनता और पर्यावरण के अनुकूल स्थायी प्रथाओं को अपनाने में मदद मिलेगी। इस उद्योग से जुडे़ वैश्विक खिलाड़ियों और अग्रणी भारतीय कंपनियों की भागीदारी के साथ, “ALUMEX इंडिया 2025” इवेंट का उद्देश्य एल्युमीनियम एक्सट्रूज़न पारिस्थितिकी तंत्र को मज़बूत करना और भारत को वैश्विक विनिर्माण क्षेत्र में अग्रणी बनाना है। 

इस आयोजन के लिए हिंडाल्को, वेदांता और खनन मंत्रालय के अंतर्गत एक स्वायत्त निकाय JNARDDC तथा एमएसएमई मंत्रालय का समर्थन मिला है। 

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