मेवाड़ के ग्रामीण और आदिवासी अंचलों में स्वास्थ्य सेवाओं को सशक्त बनाने के लिए वर्षों से किए जा रहे प्रयास अब वैश्विक मंचों तक पहुंच रहे हैं। उदयपुर की जनस्वास्थ्य विशेषज्ञ एवं बेसिक हेल्थ सर्विसेज़ इंडिया (BHS) की सह-संस्थापक डॉ. संजना मोहन को अमेरिका के मैसाचुसेट्स में आयोजित एक विशेष स्वास्थ्य संवाद में आमंत्रित किया गया, जहां उन्होंने ग्रामीण राजस्थान में विकसित समुदाय-आधारित स्वास्थ्य मॉडल और उसके प्रभावों को अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों के समक्ष प्रस्तुत किया।
‘Centering Dignity & Quality in Rural Healthcare in India’
विषय पर आयोजित इस संवाद में स्वास्थ्य नीति विशेषज्ञों, शोधकर्ताओं, सामाजिक क्षेत्र के प्रतिनिधियों और भारतीय प्रवासी समुदाय के सदस्यों ने भाग लिया। कार्यक्रम में ग्रामीण क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण, सम्मानजनक और सुलभ स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर वैश्विक स्तर पर चल रही चर्चाओं के बीच राजस्थान के जमीनी अनुभवों को विशेष रूप से सराहा गया।
डॉ. संजना मोहन पिछले कई वर्षों से दक्षिणी राजस्थान के दूरस्थ ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, सामुदायिक स्वास्थ्य जागरूकता, स्थानीय स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के प्रशिक्षण और प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने के क्षेत्र में कार्य कर रही हैं। उनके नेतृत्व में विकसित मॉडल ने यह दिखाया है कि सीमित संसाधनों के बावजूद समुदाय की भागीदारी के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और पहुंच में उल्लेखनीय सुधार लाया जा सकता है।
अपने संबोधन में डॉ. मोहन ने कहा कि ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था में स्थायी बदलाव केवल अस्पतालों और चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार से संभव नहीं है। इसके लिए समुदाय को केंद्र में रखकर काम करना, स्थानीय नेतृत्व को सशक्त बनाना और निवारक स्वास्थ्य सेवाओं पर जोर देना आवश्यक है। उन्होंने राजस्थान में किए गए विभिन्न हस्तक्षेपों और उनके परिणामों को भी साझा किया, जिन्हें प्रतिभागियों ने रुचि के साथ सुना।
इस कार्यक्रम का आयोजन अमेरिका स्थित एसोसिएशन फॉर इंडियाज़ डेवलपमेंट (AID) बोस्टन ने ‘द फ्रेंड्स ऑफ मेवाड़’ के सहयोग से किया। ‘द फ्रेंड्स ऑफ मेवाड़’ की संस्थापक पद्मजा कुमारी परमार ने कहा कि ग्रामीण भारत में हो रहे नवाचारों और जमीनी स्तर के कार्यों को वैश्विक मंचों तक पहुंचाना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि डॉ. संजना मोहन को अमेरिका में आमंत्रित किया जाना इस बात का प्रमाण है कि मेवाड़ और राजस्थान में विकसित स्वास्थ्य मॉडल अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी ध्यान आकर्षित कर रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल एक व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि मेवाड़ और राजस्थान में समुदाय आधारित स्वास्थ्य पहलों की बढ़ती वैश्विक स्वीकार्यता का प्रतीक है। जिस कार्य की शुरुआत गांवों और छोटे समुदायों से हुई थी, वह आज अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य विमर्श का हिस्सा बन रहा है।
डॉ. संजना मोहन की यह सहभागिता न केवल उदयपुर और राजस्थान के लिए गौरव का विषय है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि जमीनी स्तर पर किए गए प्रभावशाली सामाजिक और स्वास्थ्य कार्य दुनिया के किसी भी बड़े मंच पर अपनी पहचान बना सकते हैं।













Add Comment