पर्यावरण संरक्षण और जिम्मेदार पर्यटन को बढ़ावा देने की दिशा में 72वे वन्यजीव सप्ताह 2026 के तहत वन्यजीव विभाग, जयपुर एवं नीर अमृत फाउंडेशन के सहयोग से नाहरगढ़ जैविक उद्यान में पुनः उपयोग योग्य कांच की बोतलों पर आधारित पेयजल रिफिलिंग पहल शुरू की गई है। यह पहल प्रदेश ही नहीं, बल्कि देश के अन्य पर्यटन स्थलों के लिए भी एक मॉडल साबित हो सकती है।
इस अभिनव अभियान की शुरुआत सीसीएफ रामकरण खेरवा, सीसीएफ डॉ. आशीष व्यास, डीसीएफ मनफूल विश्नोई, वरिष्ठ वन्यजीव चिकित्सक अरविंद माथुर, एसीएफ जितेंद्र सिंह, देवेंद्र सिंह, योगेश, प्रहलाद,
रेंजर जोगेंद्र सिंह, रघुवेंद्र सिंह, विजयपाल ने की । इस अवसर पर अतिथियों ने पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया। नीर अमृत फाउंडेशन इस पहल में नो-प्रॉफिट, नो-लॉस आधार पर तकनीकी एवं परिचालन सहयोग प्रदान कर रहा है। यह मॉडल पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ जिम्मेदार उपभोग और सतत पर्यटन को बढ़ावा देने का प्रयास है।
“एक बोतल का बार-बार उपयोग—प्लास्टिक कचरे में कमी की दिशा में एक छोटा, लेकिन महत्वपूर्ण कदम।” के संदेश के साथ नाहरगढ़ से शुरू यह पहल भविष्य में जयपुर के अन्य प्रमुख पर्यटन स्थलों तक विस्तार की संभावनाएं रखती है।
सीसीएफ रामकरण खेरवा ने कहा कि नाहरगढ़ जैविक उद्यान में प्रतिदिन बड़ी संख्या में देशी और विदेशी पर्यटक पहुंचते हैं। पर्यटकों द्वारा उपयोग के बाद फेंकी जाने वाली प्लास्टिक की बोतलें वन्यजीवों, पर्यावरण और प्राकृतिक सौंदर्य के लिए लगातार चुनौती बन रही थीं। इसी को ध्यान में रखते हुए यह महत्वपूर्ण कदम उठाया है।
उन्होंने बताया कि नाहरगढ़ जैविक उद्यान को प्लास्टिक मुक्त रखने के लिए प्लास्टिक की पानी की बोतलों पर प्रतिबंध लगाया जा रहा है। क्षेत्र में प्लास्टिक की पानी की बोतल का उपयोग पाए जाने पर एक हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा।
उन्होंने बताया कि पर्यटकों को नाहरगढ़ जैविक उद्यान की टिकट विंडो के पास कांच की बोतल में 500 एमएल पानी 50 रुपये में उपलब्ध कराया जाएगा। खाली बोतल वापस जमा कराने पर 40 रुपये लौटाए जाएंगे। यह व्यवस्था प्रायोगिक तौर पर नीर अमृत फाउंडेशन के माध्यम से शुरू की गई है। इस पहल से सिंगल यूज प्लास्टिक की खपत में उल्लेखनीय कमी आने की उम्मीद है, साथ ही पर्यटन स्थलों पर स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।













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