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नेशनल रोड़ सेफ्टी मिशन ने जयपुर के स्कूलों को दिए नेशनल रोड़ सेफ्टीएजुकेशन एक्सीलेन्स अवॉर्ड्स 2025-26

नेशनल रोड़ सेफ्टी मिशन फॉर स्कूल्स 2025-26 का समापन आज नेशनल रोड़ सेफ्टी एजुकेशन एक्सीलेन्स अवॉर्ड्स 2025-26 के आयोजन के साथ हुआ। राजस्थान में इस पहल में 91 स्कूलों ने हिस्सा लिया, 2 पुरस्कार विजेताओं और 8 ओलम्पियाड विजेताओं को प्रोग्राम के तहत सम्मानित किया गया।  

 2024 में शुरू किया गया नेशनल रोड़ सेफ्टी मिशन एक राष्ट्रव्यापी, सहयोगपूर्ण एवं गैरसरकारी पहल है जिसका नेतृत्व तीन संगठनों द्वारा किया जाता हैएजुकेशन टेक्नोलॉजी संगठन एकेडमिया एक्सिस ऐडटेक ; इंटरनेशनल रोड़ फेडरेशन इंडिया चैप्टर, ग्लोबल रोड़ सेफ्टी एंड ट्रांसपोर्ट बॉडीऔर एजुकेशन टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्मएड्युक्सा डॉट एआई। यह मिशन 35 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 5,000 से अधिक स्कूलों तक पहुँच चुका है, और इसने 2.2 मिलियन से भी ज़्यादा लोगों को अपने साथ जोड़ा है। 

इस प्रोग्राम में स्कूल ज़ोन सुरक्षा ऑडिट, के-12 के लिए व्यवस्थित लर्निंग मॉड्यूल और स्कूलों के आसपास सुरक्षा स्थितियों का आकलन करने और उन्हें बेहतर बनाने के लिए एक रेटिंग फ्रमवर्क शामिल है। इस पहल को चुनिंदा राज्यों में सरकारी हितधारकों के सहयोग से पायलट प्रोजेक्ट के रूप में भी चलाया गया है, जिसमें ऑडिटआधारित हस्तक्षेपों और स्कूल ज़ोन के बुनियादी ढांचे पर खास ध्यान दिया गया है। 

श्रीमति रजनी ठाकुर,प्रोजेक्ट डायरेक्टर, एनआरएसएम; मणित जैन, सहसंस्थापक, हेरिटेज स्कूल्स औरआई एम टीचर’ (शिक्षकों के प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण के लिए गैरलाभकारी संस्था)   और श्री कपिला, इंटरनेशनल रोड फेडरेशन के प्रेज़ीडेंट एमेरिटस ने माननीय अतिथि के रूप में प्रोग्राम में हिस्सा लिया। 

ये पुरस्कार 1100 से अधिक संस्थानों और योगदानकर्ताओं को दिए गए जो देश भर में शुरुआती शिक्षा में सुरक्षित सड़क व्यवहार को शामिल करने में उल्लेखनीय योगदान दे रहे हैं। ओलम्पियाड विजेताओं में, सेंट एंसेल्म पिंक सिटी स्कूल, बीकानेर बॉयज़ स्कूल, आर्मी पब्लिक स्कूल (कोटा), महाराजा सवाई भवानी सिंह स्कूल और नोज़गे पब्लिक स्कूल को शीर्ष प्रदर्शन करने वालों में शामिल किया गया। इसके अतिरिक्त, सेंट एंसेल्म सीनियर सेकेंडरी स्कूल और आर्मी पब्लिक स्कूल (बीकानेर) को नेशनल सम्मान मिला।  

हम सड़क सुरक्षा को कभीकभार होने वाले जागरुकता अभियान नहीं मानते, बल्कि स्कूल के लर्निंग मॉडल में इसे शामिल करते हैं और छात्रों को उनकी उम्र के अनुसार सड़क सुरक्षा पर शिक्षित करते हैं।’’ मणित जैन ने कहा। ‘‘अब हम इस पहल को विस्तारित कर रहे हैं और 2026 तक 20 मिलियन छात्रों तक पहुंचने का लक्ष्य है।’’

सड़क पर होने वाली दुर्घटनाएं सार्वजनिक सुरक्षा की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है, खासतौर पर इसका खामियाज़ा बच्चों एवं युवाओं को भुगतना पड़ता है। अगर हम अपनी सड़कों को सुरक्षित बनाना चाहते हैं तो हमें बच्चों को कम उम्र से ही सुरक्षित आदतों के बारे में शिक्षित करना चाहिए। नेशनल रोड़ सेफ्टी मिशन फॉर स्कूल्स का उद्देश्य ऐसी पीढ़ी का निर्माण करना है जो सड़क सुरक्षा को नागरिकों को ज़िम्मेदारी मानें।’’ श्री के. के. कपिला प्रेज़ीडेन्ट, एमेरिटस इंटरनेशनल रोड़ फेडरेशन ने कहा।

‘‘ नेशनल रोड़ सेफ्टी मिशन एक प्रोग्राम से कहीं बढ़कर है, यह लोगों द्वारा लोगों के लिए शुरू की गई मुहीम है। हमारा उद्देश्य सड़कों पर सुरक्षा को सुनिश्चित करना है, जो स्कूल लीडरों एवं अभिभावकों की प्रतिबद्धता के बिना संभव नहीं है। हम एक साा मिलकर सिर्फ  सड़क यातायात के नियमों के बारे में जागरुकता बढ़ाते हैं बल्कि अपने समुदायों के भविष्य को भी सुरक्षित बनाते हैं।’’ श्रीमति रजनी ठाकुर ने कहा।

इसके अलावा श्री परवेश वर्मा, केबिनेट मंत्री, दिल्ली सरकार ने भी इस पहल को समर्थन दिया। इसके कार्यान्वयन को प्रोत्साहित करते हुए स्कूल स्तर पर सड़क सुरक्षा शिक्षा को बढ़ावा देने में इसकी प्रासंगिकता पर रोशनी डाली।