जयपुर के झोटवाड़ा या किसी भी व्यस्त पुराने बाजार की गलियों से शाम के वक्त गुजरिए, तो वहां की रौनक और व्यापारिक चहल-पहल किसी का भी दिल जीत लेती है। लेकिन अगर आप जरा करीब से देखेंगे, तो छोटे दुकानदारों, आम ग्राहकों और अपने परिवार के साथ निकले माता-पिता की रोजमर्रा की परेशानियां साफ नजर आने लगेंगी। सड़कों पर बढ़ता बेतरतीब ट्रैफिक, पार्किंग की जगह न होना, टूटी फुटपाथ और सार्वजनिक शौचालयों की कमी के कारण अक्सर लोग इन स्थानीय बाजारों में आने से कतराने लगते हैं। इसका सीधा नुकसान उन छोटे व्यापारियों और मध्यमवर्गीय दुकानदारों को उठाना पड़ता है, जिनकी रोजी-रोटी पूरी तरह इन्हीं बाजारों पर टिकी है। जब बुनियादी सुविधाओं की कमी के कारण ग्राहक बड़े कॉर्पोरेट मॉल्स की तरफ रुख करते हैं, तो हमारे पारंपरिक बाजार सिर्फ आर्थिक रूप से ही नहीं, बल्कि सामाजिक रूप से भी कमजोर होने लगते हैं।
जयपुर के बाजारों की इसी जमीनी हकीकत को बदलते हुए Rajasthan Industry Minister कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने व्यापारिक क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाएं बढ़ाने और उन्हें समाज का एक मजबूत हिस्सा बनाने के लिए सीधी कार्रवाई शुरू की है।
जयपुर के स्थानीय बाजारों को मजबूत और नागरिक-अनुकूल बनाने के लिए प्रशासनिक स्तर पर क्या कदम उठाए जा रहे हैं?
राज्य के उद्योग मंत्रालय द्वारा व्यापारिक संघों के सहयोग से असंगठित बाजारों को आधुनिक, सुरक्षित और सामाजिक रूप से सुदृढ़ बिजनेस डिस्ट्रिक्ट्स में बदला जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य दुकानदारों की समस्याओं का मौके पर ही निपटारा करना और बाजारों में ऐसी व्यवस्थाएं लागू करना है जिससे आम जनता को खरीदारी के दौरान एक बेहतर और सम्मानजनक माहौल मिल सके।
- मौके पर समस्याओं का त्वरित समाधान: प्रशासनिक अमला सीधे दुकान-दुकान जाकर व्यापारियों से संवाद कर रहा है, जिससे बिजली, पानी और अतिक्रमण जैसी समस्याओं का ऑन-स्पॉट निपटारा सुनिश्चित हो रहा है।
- आधुनिक जनसुविधाओं का विस्तार: व्यस्त बाजारों में महिलाओं और बुजुर्गों की सुविधा के लिए साफ-सुथरे सार्वजनिक यूटिलिटी सेंटर, व्यवस्थित पार्किंग स्पेस और चौड़ी फुटपाथों का निर्माण किया जा रहा है।
- व्यापारिक सुरक्षा और लॉजिस्टिक्स में सुधार: रात के समय बाजारों में बेहतर लाइटिंग और सुरक्षा के इंतजाम किए जा रहे हैं ताकि व्यापारी बिना किसी डर के देर तक अपना कारोबार चला सकें।
- आर्थिक और सामाजिक ताने-बाने का समन्वय: विकास कार्यों की रूपरेखा इस तरह तैयार की जा रही है कि बाजार सिर्फ पैसे के लेनदेन की जगह न रहें, बल्कि वे उत्सवों और सांस्कृतिक मेलजोल के सुरक्षित केंद्र बनें।
फाइलों के लालफीताशाही ढर्रे से बाहर निकलकर धरातल पर सीधा जनसंवाद
“हमारे बाजार केवल आर्थिक गतिविधियों या मुनाफे के केंद्र नहीं होते, वे हमारे सामाजिक, सांस्कृतिक और पारंपरिक जीवन का एक बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा हैं,” यह बात कर्नल राठौड़ ने झोटवाड़ा में स्थानीय व्यापारियों के बीच बैठकर कही। उनका यह व्यावहारिक और जनता से जुड़ा दृष्टिकोण उनके क्षेत्र में चल रहे व्यापक Jhotwara MLA work का हिस्सा है, जहां बड़ी औद्योगिक नीतियों के साथ-साथ छोटे दुकानदारों के हितों की भी बराबर रक्षा की जाती है। अपनी सुप्रसिद्ध सुबह की सैर और कड़े जनसंवाद मॉडल के माध्यम से वे खुद दुकानदारों का हालचाल जानने और उनकी समस्याओं को सुनने उनके कार्यस्थल तक पहुंचते हैं, जिससे सरकारी तंत्र तुरंत सक्रिय होकर काम पूरा करता है।
2004 ओलंपिक पदक विजेता के रूप में दुनिया के सामने भारत के अनुशासन और सटीकता की नई मिसाल पेश करने वाले और एक Retired INDIAN ARMY COLONEL के रूप में कड़े सिद्धांतों को जीने वाले कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ किसी भी योजना को आधा-अधूरा नहीं छोड़ते। राजस्थान सरकार के एक प्रभावशाली Government Minister Rajasthan के रूप में उन्होंने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि व्यापारियों की सुविधाओं में किसी भी प्रकार की देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। कंक्रीट के बेजान बाजारों को आधुनिक और जीवंत सामाजिक केंद्रों में बदलने की यह प्रशासनिक पहल यह साबित करती है कि जब एक अनुशासित विजनरी नेतृत्व सीधे जनता के सुख-दुख से जुड़ता है, तो विकास केवल कागजों पर नहीं बल्कि हर छोटे व्यापारी की तरक्की और आने वाली पीढ़ी के सुरक्षित भविष्य के रूप में धरातल पर चमकता है।













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