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वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की नई गोल्ड डिमांड ट्रेंड्स रिपोर्ट

वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की नई गोल्ड डिमांड ट्रेंड्स रिपोर्ट से पता चलता है कि दूसरी तिमाही में सोने की मांग (ओटीसी को छोड़कर) साल-दर-साल आधार पर 8% घटकर 948 टन पर आ गई है। हालांकि, पहली तिमाही में मजबूत ईटीएफ इंफ्लो के कारण 2022 की पहली छमाही में सोने की मांग 2021 की पहली छमाही की तुलना में 12% बढ़कर 2,189 टन हो गई।

अप्रेल में दुनिया में भूराजनीतिक हलचल और मुद्रास्फीति के बढ़ते दबाव की वजह से शुरुआत में बढ़ने के बाद 2022 की दूसरी तिमाही में सोने की कीमत में गिरावट आई क्योंकि निवेशकों का ध्यान तेजी से बढ़ती ब्याज दरों और आश्चर्यजनक रूप से मजबूत होते अमेरिकी डॉलर की तरफ चला गया था।

तिमाही के दौरान सोने की कीमत में 6% की गिरावट ने गोल्ड ईटीएफ पर असर डाला, जिसमें दूसरी तिमाही में 39 टन का आउटफ्लो था। 2021 की पहली छमाही में 127 टन के आउटफ्लो की तुलना में पहली छमाही का शुद्ध इंफ्लो 234 टन रहा। हालांकि, लगातार कीमतों में वृद्धि के बीच मुद्रास्फीति आउटलुक के सॉफ्ट रहने की संभावना को देखते हुए, दूसरी तिमाही की गिरावट दूसरी छमाही में ईटीएफ के कमजोर रहने का इशारा करती है।

दूसरी तिमाही में गोल्ड बार और सिक्के की मांग साल-दर-साल आधार पर 245 टन पर स्थिर बनी रही। मांग में यह बढ़ोतरी खासतौर से भारत, मिडल ईस्ट और टर्की से देखने को मिली, इसने चीनी मांग में कमी को संतुलित करने में मदद की जो कुछ हद तक कोरोना वायरस के कारण लगे लॉकडाउन की वजह से भी थी। इसके कारण, दुनिया भर में गोल्ड बार और सिक्कों की मांग में साल-दर-साल हिसाब से 12% की गिरावट आई और यह पहली छमाही में 526 टन पर आ गई।

आभूषणों के क्षेत्र में दूसरी तिमाही में सोने की मांग साल-दर-साल 4% बढ़कर 453 टन हो गई, इसे भारतीय मांग में बढ़ोतरी का फायदा मिला, जो 2021 की दूसरी तिमाही की तुलना में 49% ज़्यादा हो गई। भारत में मजबूती के कारण चीन में आई 28% की ज़बरदस्त गिरावट को संतुलित करने में मदद मिली, जहां कोरोनो वायरस के कारण लगे लॉकडाउन से बाजार पर असर पड़ा था क्योंकि लॉकडाउन से आर्थिक गतिविधियां रुक गई थीं और उपभोक्ता खर्च में कमी आई थी।

दूसरी तिमाही में केंद्रीय बैंक नेट खरीदार रहे, जिससे पूरी दुनिया में आधिकारिक भंडार में 180 टन की बढ़ोतरी हुई। हमारे हाल के केंद्रीय बैंक सर्वे के नतीजों के अनुरूप ही पहली छमाही में शुद्ध खरीद 270 टन तक पहुंच गई। सर्वे में 25% उत्तरदाताओं ने कहा कि वे अगले 12 महीनों में अपने सोने के भंडार को बढ़ाने का इरादा रखते हैं।[1]

टैक्नोलॉजी सेक्टर की तरफ देखें, तो सोने की मांग 2021 की दूसरी तिमाही की तुलना में 2% कम होकर 78 टन पर आ गई, और इस कारण, 2022 की पहली छमाही में मांग में साल-दर-साल 159 टन की मामूली कमी देखी गई। इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में सप्लाई चेन से जुड़ी समस्याएं बनी हुई हैं और रहन-सहन का खर्च बढ़ने से ग्राहकों की तरफ से आने वाली इलेक्ट्रॉनिक्स की मांग में भी कमी आई है। इन दोनों के कारण मांग में मामूली गिरावट आई है।

हमारी गोल्ड डिमांड ट्रेंड डेटा सीरीज[2] के हिसाब से वर्ष की पहली छमाही में खनन से होने वाला सोने का उत्पादन 1,764 टन की रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गया, जो 2021 की पहली छमाही से 3% ज़्यादा है। ऊंचे ग्रेड के डिपोजिट खनन करने वाले कुछ प्रोजक्ट्स और पिछले साल सुरक्षा वजहों से लगी रोक के बाद अब चीनी खनन उद्योग के सामान्य उत्पादन स्तर पर लौटने के कारण उत्पादन को बढ़ावा मिला। पहली तिमाही में सोने की ऊंची कीमतों और बढ़ती आर्थिक कठिनाई व अनिश्चितता के कारण रीसाइक्लिंग गतिविधियों में तेजी आई है और साल-दर-साल हिसाब से पहली छमाही में कुल रीसाइक्लिंग 8% बढ़कर 592 टन तक पहुंच गई है।


[1] World Gold Council, Annual Central Bank Survey – June 2022 https://www.gold.org/goldhub/data/2022-central-bank-gold-reserve-survey

[2] The Gold Demand data series referenced here dates back to the year 2000

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