भारत की अग्रणी शिक्षा-केंद्रित एनबीएफसी (NBFC), ऑक्सिलो फिनसर्व ने अपने घरेलू शिक्षा ऋण व्यवसाय इंडिया-एड (IndiaEd) का विस्तार करते हुए एक नई सुविधा शुरू की है। इसके तहत अब देशभर के पंजीकृत स्कूलों और कॉलेजों को सीधे फीस भुगतान की सुविधा प्रदान की जाएगी। यह कार्यक्रम स्कूली शिक्षा (K-12) से लेकर स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर के इंजीनियरिंग, मेडिकल व मैनेजमेंट जैसे सभी प्रमुख पाठ्यक्रमों को कवर करता है। कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया है कि ऋण की पूरी प्रक्रिया डिजिटल होगी और लोन की स्वीकृति मिलने के मात्र 48 घंटों के भीतर राशि सीधे संबंधित शैक्षणिक संस्थान के खाते में ट्रांसफर कर दी जाएगी।
अनुसंधान रिपोर्टों के अनुसार, भारत में शिक्षा की लागत प्रतिवर्ष अनुमानित 10-12 प्रतिशत की दर से बढ़ रही है, जो सामान्य उपभोक्ता महंगाई दर की तुलना में काफी अधिक है। इसके परिणामस्वरूप परिवारों पर वित्तीय बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है। दूसरी ओर, शैक्षणिक संस्थानों के लिए समय पर फीस का संग्रह करना उनके सुचारू संचालन, कर्मचारियों के समय पर वेतन भुगतान और नियोजित विकास कार्यों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हो गया है।
ऑक्सिलो फिनसर्व के ‘इंडिया-एड‘ विभाग के मुख्य व्यवसाय अधिकारी, आनंद सुब्रमण्यम ने कहा, “अधिकांश स्कूल और कॉलेज अपनी आय के मुख्य स्रोत के रूप में पूरी तरह फीस पर निर्भर रहते हैं। फीस संग्रह में होने वाली देरी से न केवल वेतन भुगतान का चक्र प्रभावित होता है, बल्कि बुनियादी ढांचे में होने वाला निवेश भी टल जाता है और भविष्य की शैक्षणिक योजनाओं पर बुरा असर पड़ता है।”
मुख्य बिंदुः
- भारत में शिक्षा पर घरेलू खर्च वित्त वर्ष 2012 के ₹1.8 लाख करोड़ से बढ़कर वित्त वर्ष 2024 में ₹8.43 लाख करोड़ हो गया है, जो पिछले 12 वर्षों में 4.6 गुना वृद्धि को दर्शाता है।
- प्रत्येक आठ नामांकित छात्रों में से एक छात्र कोर्स पूरा करने से पहले पढ़ाई छोड़ देता है, जिनमें 62% से अधिक ड्रॉपआउट स्कूल स्तर पर होते हैं।
- एनएसओ (NSO) के 75वें राउंड सर्वे के अनुसार, 24.3 प्रतिशत पुरुष और 17.7 प्रतिशत महिला ड्रॉपआउट्स ने आर्थिक कठिनाइयों को पढ़ाई छोड़ने का कारण बताया। सेकेंडरी स्तर पर ग्रॉस एनरोलमेंट रेशियो 77.4 प्रतिशत और हायर सेकेंडरी स्तर पर 56.2 प्रतिशत है।
- ऑक्सिलो फिनसर्व का इंडिया-एड (IndiaEd) मॉडल परिवारों और शैक्षणिक संस्थानों दोनों की इस समस्या का समाधान प्रस्तुत करता है। अब परिवार एकमुश्त फीस भुगतान को अपनी पसंद की अवधि के अनुसार मासिक किस्तों में बदल सकते हैं। वहीं, पंजीकृत संस्थानों को फीस का भुगतान सीधे उनके खातों में प्राप्त होगा।
ऑक्सिलो फिनसर्व का इंडिया-एड (IndiaEd) मॉडल परिवारों और शैक्षणिक संस्थानों, दोनों के लिए एक प्रभावी समाधान पेश करता है। इस मॉडल के तहत, अभिभावक अब स्कूल या कॉलेज की भारी-भरकम एकमुश्त फीस को अपनी सुविधानुसार मासिक किस्तों (EMIS) में बदल सकते हैं। साथ ही, पंजीकृत संस्थानों को पूरी फीस सीधे उनके बैंक खातों में प्राप्त हो जाती है, जिससे उनकी वित्तीय प्रक्रियाएँ सुरक्षित रहती हैं।
“ऑनलाइन आवेदन, मात्र 48 घंटों के भीतर लोन का वितरण (Disbursement) और सीधे संस्थानों को भुगतान ये खूबियाँ पूरी प्रक्रिया को बेहद सरल बनाती हैं। इससे स्कूलों और कॉलेजों को समय पर फीस मिलने की निश्चितता होती है, वहीं परिवारों को बच्चों की शिक्षा में निवेश करने का एक व्यवस्थित और सम्मानजनक विकल्प मिलता है। यह औपचारिक वित्तीय व्यवस्था लंबे समय से चली आ रही एक बड़ी जरूरत को पूरा करती है।”
यह कार्यक्रम मेट्रो, टियर-1 और टियर-2 शहरों के सभी शैक्षणिक संस्थानों के लिए खुला है। जो संस्थान अपने छात्रों को इंडिया-एड (IndiaEd) की सुविधा प्रदान करना चाहते हैं, वे www.auxilo.com पर Auxilo Finserve Institutional Partnership Desk के माध्यम से आसानी से पंजीकरण कर सकते हैं।













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