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भारत की विकास की रफ्तार बरकरार: पीएल वेल्थ

पीएल वेल्थ की मार्केट आउटलुक: जुलाई 2026 रिपोर्ट के अनुसार कच्चे तेल की ऊंची कीमतों रुपये में कमजोरी और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली से अल्पकालिक उतार-चढ़ाव जरूर बना हुआ है लेकिन भारत की अर्थव्यवस्था की बुनियादी मजबूती कायम है। इसी वजह से रिपोर्ट निवेशकों को शेयर बाजार में व्यापक निवेश के बजाय गुणवत्तापूर्ण शेयरों के चयन पर जोर देने की सलाह देती है। रिपोर्ट के मुताबिक वित्त वर्ष 2025-26 (वित्त वर्ष 26) के लिए भारत की जीडीपी वृद्धि दर का शुरुआती अनुमान 7.7प्रतिशत रहा है जबकि भारतीय रिजर्व बैंक ने वित्त वर्ष27 के लिए इसे घटाकर 6.6प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है। जून 2026 में परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स के अनुसार विनिर्माण क्षेत्र का सूचकांक 54.2 और सेवा क्षेत्र का 57.4 रहा। यह मई की तुलना में थोड़ा कम जरूर है, लेकिन दोनों ही विस्तार के दायरे में बने हुए हैं।

पीएल वेल्थ के सीईओ इंदरबीर जॉली ने कहा भारत वित्त वर्ष27 में अपेक्षाकृत मजबूत स्थिति के साथ प्रवेश कर रहा है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि जोखिम खत्म हो गए हैं। कच्चे तेल की कीमतें, रुपये की चाल और नए नेतृत्व में अमेरिकी फेडरल रिजर्व की अप्रत्याशित नीतियां अभी भी प्रमुख जोखिम हैं। आरबीआई ने फिलहाल ब्याज दरों में विराम दिया है, लेकिन बाजार अभी भी उतार-चढ़ाव का सामना कर रहे हैं। ऐसे माहौल में निवेशकों को व्यापक बाजार के पीछे भागने के बजाय मजबूत गुणवत्ता वाली कंपनियों को प्राथमिकता देनी चाहिए। पिछले कुछ महीनों की परिस्थितियां भारत को लेकर हमारे मध्यम और दीर्घकालिक भरोसे को नहीं बदलतीं, जो जनसांख्यिकीय ताकत, घरेलू निवेश और मजबूत होते वित्तीय बाजारों पर आधारित है।”

रिपोर्ट के अनुसार, कारोबार और खुदरा ग्राहकों को दिए गए ऋण में सालाना आधार पर 17.7प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जिससे कुल बकाया ऋण 215.15 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया। वहीं, उद्योगों की क्षमता उपयोग दर बढ़कर 75.2प्रतिशत रही, जो दीर्घकालिक औसत से अधिक है।

हालांकि, रिपोर्ट में महंगाई के बढ़ते जोखिम को लेकर भी आगाह किया गया है। आरबीआई ने वित्त वर्ष27 के लिए खुदरा महंगाई का अनुमान बढ़ाकर 5.1प्रतिशत कर दिया है, जबकि तीसरी तिमाही में इसके 5.9प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान है। रिपोर्ट के मुताबिक, कच्चे तेल की लगातार ऊंची कीमतें, पश्चिम एशिया में जारी तनाव और डॉलर के मुकाबले रुपये का 94.5-95 के स्तर तक कमजोर होना आने वाले महीनों में बाजार में उतार-चढ़ाव बनाए रख सकता है। ऐसे में निवेशकों को सोच-समझकर चुनिंदा निवेश करने की सलाह दी गई है।

व्यापक आर्थिक परिदृश्य : जून में आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति ने सतर्क रुख अपनाते हुए रेपो दर को 5.25प्रतिशत पर बरकरार रखा। साथ ही महंगाई का अनुमान बढ़ाया और आर्थिक वृद्धि का अनुमान घटाया। रिपोर्ट ने इसे लंबे समय तक ऊंची ब्याज दरों वाला रुख बताया है। भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 667 अरब अमेरिकी डॉलर पर पहुंच गया है, जो लगभग 10.5 महीने के आयात के लिए पर्याप्त है। जून 2026 में जीएसटी संग्रह सालाना आधार पर 13.9प्रतिशत बढ़कर 1.95 लाख करोड़ रुपये रहा, जो पिछले एक वर्ष का सबसे ऊंचा मासिक स्तर है। इसका प्रमुख कारण आयात से जुड़े कर संग्रह में मजबूती रही।

व्यापार के मोर्चे पर भारत के ब्रिटेन, न्यूजीलैंड, ईएफटीए और ओमान के साथ व्यापार समझौते लागू हो चुके हैं। यूरोपीय संघ के साथ मुक्त व्यापार समझौते पर अंतिम मंजूरी का इंतजार है, जबकि अमेरिका के साथ द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर बातचीत जारी है। रिपोर्ट में मानसून पर भी नजर बनाए रखने की बात कही गई है, क्योंकि अल नीनो की स्थिति बनी हुई है और जून में बारिश सामान्य से करीब 40प्रतिशत कम रही।

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