भारत में प्रीमियम एल्कोहलिक बेवरेज इंडस्ट्री के अग्रणी संगठन एवं जिम्मेदारी से उपभोग के मजबूत पैरोकार इंटरनेशनल स्पिरिट्स एंड वाइन्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (आईएसडब्ल्यूएआई) ने राज्य सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। संगठन ने स्पिरिट्स उद्योग की इनपुट और पैकेजिंग लागत में अभूतपूर्व वृद्धि को देखते हुए हस्तक्षेप की मांग की है। पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष और इस कारण से वैश्विक स्तर पर ऊर्जा एवं कमोडिटी के संकट के कारण यह बढ़ोतरी हुई है।
तेल, गैस, कोयला और पेट्रोकेमिकल फीडस्टॉक में भारी अस्थिरता कई कैटेगरी में पैकेजिंग लागत में वृद्धि का कारण बनी है, जिससे मैन्यूफैक्चरर्स के पास ऑपरेशनल एफिशिएंसी या वैकल्पिक स्रोत की मदद से इस बढ़ी हुई लागत को वहन करने की बहुत कम गुंजाइश बची है।
एल्कोहलिक बेवरेज इंडस्ट्री इस समय इनपुट, पैकेजिंग, माल ढुलाई एवं ऊर्जा लागत में तेज और लगातार बढ़ोतरी का सामना कर रही है। इसकी वजह पश्चिम एशिया में चल रहा संकट और उसके कारण वैश्विक कमोडिटी बाजारों में आई अस्थिरता है। पिछले दो वर्षों में कांच की बोतलें, ढक्कन, लेबल, पीईटी रेजिन और कार्टन जैसे मुख्य पैकेजिंग मैटेरियल की कीमतों में बहुत बढ़ोतरी हुई है। इससे स्पिरिट सेक्टर में कुल मैन्यूफैक्चरिंग लागत काफी बढ़ गई है। इस उद्योग की ऑपरेशनल कॉस्ट में पैकेजिंग की बड़ी हिस्सेदारी होती है। ऐसे में मैन्यूफैक्चरर्स के लिए बाहरी कारणों से बढ़ती इस लागत को सरकार द्वारा मंजूर किए गए प्राइस स्ट्रक्चर के भीतर समायोजित करना लगातार मुश्किल होता जा रहा है।
इंटरनेशनल स्पिरिट्स एंड वाइन्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (आईएसडब्ल्यूएआई) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) श्री संजीत पाधी ने कहा, “जिन राज्यों में कीमतें नियंत्रित हैं, हम उन राज्यों से आग्रह करते हैं कि वे कीमतों में बदलाव के लिए एक संतुलित एवं व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाएं। इससे कारोबार की निरंतरता बनी रहेगी, उपभोक्ताओं को बिना किसी रुकावट के आपूर्ति सुनिश्चित होगी, पूरी वैल्यू चेन में रोजगार सुरक्षित रहेगा और राज्य के एक्साइज रेवेन्यू तथा व्यापक अर्थव्यवस्था में इस उद्योग का महत्वपूर्ण योगदान बना रहेगा।”
अत्यधिक ऊर्जा की खपत के कारण स्पिरिट्स की पैकेजिंग के लिए मुख्य रूप से इस्तेमाल होने वाली कांच की बोतलें और इन्हें बनाने की प्रक्रिया बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। वर्ष 2024–25 के दौरान और 2026 की शुरुआत तक, सोडा ऐश की बढ़ी हुई कीमतों के साथ-साथ प्राकृतिक गैस एवं कोयले की कीमतों में उतार-चढ़ाव के कारण भट्टियों को चलाने की लागत बहुत बढ़ी है। इससे कांच की बोतलों की कीमतों में लगभग 11–17 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।
प्लास्टिक कैप और क्लोजर में भी इसी तरह महंगाई का दबाव दिख रहा है, जहां मैन्यूफैक्चरिंग लागत में एचडीपीई और पीपी रेजिन की बड़ी हिस्सेदारी होती है। फरवरी–मार्च 2026 के दौरान वैश्विक पॉलीमर बाजारों में भारी बढ़ोतरी देखी गई; पॉलीइथिलीन की कीमतें महीने-दर-महीने लगभग 30 प्रतिशत तक बढ़ गईं, और इसके साथ ही घरेलू एचडीपीई और पीपी की कीमतों में भी बढ़ोतरी हुई है। इसका नतीजा यह हुआ कि कैप और क्लोजर की लागत में 15–20 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो गई।
वैधानिक और नियामकीय नियमों के पालन के लिए अनिवार्य लेबल भी काफी महंगे हो गए हैं। 2024 से लेकर 2026 की शुरुआत तक, पॉलीमर-आधारित बीओपीपी फिल्मों और कागज-आधारित इनपुट की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी देखी गई है; इसकी मुख्य वजह फीडस्टॉक, पल्प, एनर्जी और लॉजिस्टिक्स की लागत में हुई वृद्धि है। इससे लेबल की लागत में 13–17 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।
स्पिरिट्स के कुछ खास सेगमेंट्स में पीईटी बोतलों की कीमतों में भी काफी बढ़ोतरी देखी गई है। 2026 की शुरुआत में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और ग्लोबल सप्लाई में रुकावटों की वजह से पीईटी रेजिन की कीमतों में 1.00–1.10 डॉलर प्रति किलोग्राम के बीच उतार-चढ़ाव होता रहा, जिसके चलते पीईटी बोतलों की लागत में 8–12 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई।
इसके अलावा, स्टोरेज, ट्रांसपोर्टेशन और रिटेल हैंडलिंग के लिए जरूरी सेकेंडरी पैकेजिंग मैटेरियल जैसे कार्टन और पेपरबोर्ड की कीमतों में 10–14 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यह बढ़ोतरी पल्प और एनर्जी की कीमतों में लगातार आ रही महंगाई को दिखाती है।
कुल मिलाकर, 2024–25 से लेकर 2026 की शुरुआत तक पैकेजिंग सामग्री की कीमतों में हुई कुल बढ़ोतरी, लगभग 15–20 प्रतिशत की भारित औसत (वेटेट एवरेज) बढ़ोतरी को दिखा रही है। स्पिरिट्स उद्योग में, बेचे गए माल की कुल लागत (सीओजीएस) का लगभग 40–50 प्रतिशत हिस्सा पैकेजिंग पर खर्च होता है (इसमें टैक्स शामिल नहीं हैं)। नतीजतन, ऊर्जा की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण पैदा हुई इस महंगाई की वजह से सीओजीएस में कुल मिलाकर लगभग 7–10 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान है। इस वृद्धि में अन्य परिचालन दबावों (ऑपरेटिंग प्रेशर) को शामिल नहीं किया गया है।













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