एचडीएफसी बैंक के मुख्य कॉरपोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी (सीएसआर) कार्यक्रम, एचडीएफसी बैंक परिवर्तन ने घोषणा की है कि उसने पूरे भारत में कुल मिलाकर 15,289 से ज़्यादा जल निकायों का निर्माण किया हैं और उनकी मरम्मत की है। ये निकायें 10,430 से ज़्यादा गाँवों में फैले हैं और इनसे 14.92 लाख परिवारों को मदद मिली है। इसके ‘स्वास्थ्य और स्वच्छता’ ( हेल्थ एंड हाइजीन) स्तंभ के तहत, 950 से ज़्यादा गाँवों को सामुदायिक शुद्धिकरण प्रणालियों के माध्यम से सुरक्षित पेयजल भी उपलब्ध कराया गया है।
एचडीएफसी बैंक की सीएसआर हेड, सुश्री नुसरत पठान ने इस मौके पर बोलते हुए कहा, “एचडीएफसी बैंक परिवर्तन में हमने समुदायों तक पहुँचने और उनकी ज़रूरतों को पूरा करने का काम किया है, चाहे पहाड़ों में ‘आइस स्तूप’ बनाना हो या उन गाँवों में पानी शुद्ध करने वाले प्लांट लगाना हो, जहाँ पहले कभी साफ़ नल का पानी नहीं पहुँचा था। ‘परिवर्तन’ के ज़रिए हमारा काम वाटरशेड डेवलपमेंट, बारिश के पानी को जमा करना, जल निकायों का निर्माण और उन्हें फिर से जीवित करना, आखिरी छोर तक सिंचाई का इंफ्रास्ट्रक्चर पहुँचाना और पर्यावरण के अनुकूल खेती के तरीकों को बढ़ावा देना है। 15,000 से ज़्यादा जल संरचनाएँ बनाना और लगभग एक हज़ार गाँवों को सुरक्षित पीने का पानी उपलब्ध कराना एक बड़ी उपलब्धि है, लेकिन हमारी असली सफलता उन खेतों में दिखती है जहाँ अब दूसरी फ़सल भी उगती है और उन बच्चों में जो अब गंदे पानी की वजह से बीमार नहीं पड़ते। हम एक ‘जल-सुरक्षित भारत’ बनाने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध हैं।”
बैंक ने इन सभी क्षेत्रों में जल से जुडे कई तरह के संसाधनों का निर्माण के साथ-साथ उनकी मरम्मत की है। इनमें खेतों में तालाब ( फार्म पोंडस), चेक डैम, पानी के बँटवारे के लिए ‘जल मीनार’, और स्कूलों, स्वास्थ्य केंद्रों तथा घरों पर वर्षा जल संचयन (रेन वाटर हार्वेस्टिंग) प्रणालियाँ शामिल हैं। मध्य भारत में, ‘वाटर’ पहल के माध्यम से ‘लिफ्ट सिंचाई’ और ‘रीचार्ज कुओं’ ने आदिवासी किसान समुदायों तक पानी की पहुँच बढ़ाई है। पेयजल के लिए, बैंक ने स्थानीय जल स्रोतों के विश्लेषण के आधार पर यूवी, आरओ या कई चरणों वाली शुद्धिकरण (मल्टी स्टेज फिल्ट्रेशन) तकनीक का उपयोग करके छोटे शुद्धिकरण संयंत्र लगाए हैं। इन्हें सामुदायिक जल टैंक, नल के कनेक्शन और पानी की गुणवत्ता की निगरानी करने वाली प्रणालियों का भी सहयोग मिला है।
केवल जल निकायें बनाने से ही खेती में बदलाव नहीं आता। एचडीएफसी बैंक परिवर्तन हर संरचनात्मक निवेश के साथ कृषि संबंधी सहायता भी देता है। इसमें सूक्ष्म सिंचाई प्रणालियाँ माइक्रो इरिगेशन सिस्टमस), ‘शेड नेट हाउस’, ‘जैव-इनपुट संसाधन केंद्र’ ( बायो इनपुट रिसोर्स सेंटर्स) और ‘बहु-स्तरीय खेती’ (मल्टी लेयर फार्मिंग) के तरीके शामिल हैं। इन सभी के मिले-जुले प्रयासों से सिंचाई के अंतर्गत आने वाला क्षेत्र बढ़ा है, अनियमित वर्षा पर निर्भरता कम हुई है, और छोटे किसानों की फ़सलों की पैदावार में सुधार हुआ है। जल का उपयोग करने वाले सामुदायिक समूहों को ‘जल बजट’ बनाने और पानी का समझदारी से उपयोग करने का प्रशिक्षण दिया जाता है। इससे यह सुनिश्चित होता है कि कोई भी जल संरचना बनने के लंबे समय बाद तक भी उपयोगी बनी रहे।













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