अप्रैल 2026 के शुरुआती दिनों में राजस्थान के कई हिस्सों में अचानक मौसम बदला। पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) की वजह से तेज आंधी, भारी बारिश और ओलावृष्टि ने उन किसानों की नींद उड़ा दी, जिनकी गेहूं, सरसों और रबी की फसलें खेतों में खड़ी थीं — या अभी-अभी कटाई के बाद मैदान में पड़ी थीं।
झोटवाड़ा विधानसभा क्षेत्र के विधायक और राजस्थान के कैबिनेट मंत्री कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ ने इस स्थिति को गंभीरता से लेते हुए तुरंत प्रशासनिक कार्रवाई के आदेश दिए। प्रभावित किसानों को यह जानना ज़रूरी है कि आगे क्या होगा — और वे अपना मुआवजा कैसे प्राप्त कर सकते हैं।
राजस्थान में ओलावृष्टि की स्थिति — क्या हुआ?
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार 3-4 अप्रैल 2026 को राजस्थान के 20 से अधिक जिलों में तेज आंधी, बारिश और ओलावृष्टि का अलर्ट जारी था। जयपुर, अजमेर, बीकानेर, श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, चूरू, जैसलमेर, नागौर और टोंक सहित कई इलाकों में नुकसान की खबरें आईं।
- 20+ राजस्थान के जिले — ओलावृष्टि और तूफान की चेतावनी में
- 7°C तापमान में अचानक गिरावट — फसलों को दोहरा नुकसान
- 7 अप्रैल नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने की संभावना — IMD
झोटवाड़ा और आसपास के ग्रामीण इलाकों में गेहूं की पकी हुई फसल, जो कटाई के लिए तैयार थी, इस मौसम की मार से बुरी तरह प्रभावित हुई। किसानों के लिए यह स्थिति विशेष रूप से कठिन थी — क्योंकि पूरे रबी सीजन की मेहनत कटाई से ठीक पहले बर्बाद होने की कगार पर थी।

MLA राज्यवर्धन राठौड़ ने क्या किया?
कर्नल राठौड़ — जो खुद एक पूर्व सैन्य अधिकारी हैं और जानते हैं कि ज़मीनी हकीकत कितनी तेज़ी से बदल सकती है — ने बिना देर किए प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देश दिए। उनके आदेशों के प्रमुख बिंदु थे:
- प्रभावित गाँवों में तुरंत गिरदावरी (फसल नुकसान सर्वे) शुरू की जाए — बिना देर किए
- राजस्व और कृषि विभाग की संयुक्त टीमें खेतों में भेजी जाएं और Geo-tagging के साथ रिपोर्ट तैयार की जाए
- सर्वे रिपोर्ट प्राथमिकता से आपदा प्रबंधन विभाग को भेजी जाए ताकि मुआवजा जल्द से जल्द जारी हो
- कर्नल राठौड़ के कार्यालय से प्रभावित किसान सीधे संपर्क कर सकते हैं
झोटवाड़ा के किसानों के लिए: यदि आपकी फसल ओलावृष्टि या तूफान से प्रभावित हुई है, तो अपने नज़दीकी पटवारी या तहसीलदार कार्यालय जाएं और गिरदावरी में अपना नाम दर्ज कराएं। बिना दर्ज हुए मुआवजा नहीं मिलेगा।
किसानों को मुआवजा कैसे मिलेगा — पूरी प्रक्रिया
राजस्थान में ओलावृष्टि और प्राकृतिक आपदा से फसल नुकसान पर राहत देने की एक निश्चित प्रक्रिया है। इसे समझना ज़रूरी है ताकि कोई भी पात्र किसान वंचित न रह जाए:
- गिरदावरी (Girdawari): सरकारी अमला खेत में आकर नुकसान का प्रतिशत तय करता है। यह सबसे पहला और सबसे ज़रूरी कदम है।
- राज्य राहत कोष (SRF): जिन किसानों का नुकसान 33% या उससे अधिक है, उन्हें राज्य आपदा राहत कोष से सहायता मिलती है।
- PM फसल बीमा योजना (PMFBY): अगर आपने बीमा कराया है, तो कटाई के 14 दिन के भीतर भी नुकसान का दावा किया जा सकता है। pmfby.gov.in पर जाकर क्लेम दर्ज करें।
- DBT (Direct Benefit Transfer): मुआवजा राशि सीधे आपके बैंक खाते में भेजी जाती है — बिच्चोलिए की ज़रूरत नहीं।
अगर फसल पहले ही काट ली है और खेत में पड़ी थी: PMFBY के तहत “post-harvest loss” (कटाई के बाद नुकसान) का प्रावधान है। कटाई के 14 दिन के भीतर अगर बारिश/ओले से नुकसान हुआ, तो बीमा क्लेम किया जा सकता है। अपने बीमा कंपनी या CSC केंद्र से संपर्क करें।
राजस्थान सरकार का रुख — CM और प्रशासन सक्रिय
राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने भी इस मुद्दे पर तत्काल संज्ञान लिया और सभी जिला कलेक्टरों को निर्देश दिए कि फसल नुकसान का सर्वे जल्द से जल्द पूरा किया जाए। उन्होंने कहा: “राजस्थान की समृद्धि उसके किसानों की नींव पर टिकी है।”
विकसित झोटवाड़ा पोर्टल पर कर्नल राठौड़ के नेतृत्व में पहले से चल रहे ₹924 करोड़ के विकास कार्यों — सड़क, पानी, नालियां — के साथ-साथ कृषि परिवारों को राहत पहुंचाने की यह पहल, उनकी प्राथमिकताओं को दर्शाती है।
आगे क्या होगा — IMD की चेतावनी
IMD ने सूचित किया है कि 7 अप्रैल से एक और पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो सकता है, जिससे राजस्थान में एक बार फिर आंधी-बारिश और ओलावृष्टि की संभावना है। इसलिए किसानों को सलाह दी गई है कि:
- कटी हुई फसल को तुरंत ढककर या सुरक्षित जगह पर भंडारित करें
- मंडी में रखे अनाज को ढकने का प्रबंध करें
- बाग-बगीचों में ओले-रोधी नेट (hail nets) का इस्तेमाल करें
- IMD के ताज़े अपडेट और स्थानीय प्रशासन की एडवाइज़री पर नज़र रखें












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