Business Featured

एक्सिस मैक्स लाइफ इंश्योरेंस की डिजिटल-फर्स्ट स्ट्रेटजी के साथ जीवन बीमा की पहुंच मात्र 2.8 प्रतिशत तक

एक्सिस मैक्स लाइफ इंश्योरेंस के सीनियर डायरेक्टर एंड चीफ डिस्ट्रीब्यूशन ऑफिसर मिस्टर सुमित मदान  का कहना है कि,  डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर, नियमन और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में तरक्की के बावजूद देश में बीमा की पहुंच मात्र 2.8 प्रतिशत तक ही हो पाई है। यह आंकड़ा विशेष रूप से कम आय वाले एवं ग्रामीण क्षेत्रों में कवरेज की कमी दिखाता है। इन क्षेत्रों में ओटीटी सब्सक्रिप्शन और डिजिटल पेमेंट को लोग तेजी से अपना रहे हैं, लेकिन जीवन बीमा अभी भी वित्तीय प्राथमिकताओं के मामले में बहुत पीछे है। यह स्थिति दिखा रही है कि बीमा कंपनियों को ग्रामीण भारत के पैटर्न को ध्यान में रखते हुए अपने डिस्ट्रीब्यूशन मॉडल पर फिर से विचार करने की जरूरत है। ऐसा करते हुए कंपनियों को ‘सभी के लिए बीमा’ के इरडा के लक्ष्य की दिशा में बढ़ना होगा।

भारत के 2047 के व्यापक विकास लक्ष्यों के अनुरूप, जीवन बीमा की पहुंच का विस्तार करना महत्वपूर्ण है। जीवन बीमा कवरेज को दोगुना करने और कमजोर वर्गों के लिए वित्तीय सुरक्षा में सुधार जैसे ठोस परिणामों पर ध्यान केंद्रित करके, बीमा कंपनियां धीरे-धीरे इन लक्ष्यों की ओर बढ़ सकती हैं। पहली बार पॉलिसी लेने वालों की संख्या और ग्रामीण क्षेत्रों में बीमा कवरेज के विस्तार जैसे संकेतक प्रगति को मापने में मदद कर सकते हैं।

जीवन बीमा की पहुंच का विस्तार केवल मार्केट का विस्तार नहीं है, यह नैतिक रूप से भी महत्वपूर्ण है। डिजिटल-फर्स्ट स्ट्रेटजी के दम पर बीमा कंपनियों के पास लाखों लोगों के वित्तीय भविष्य को सुरक्षित करने, आर्थिक विकास को गति देने और वंचित क्षेत्रों में बदलाव लाने का मौका है। सुविधा के लिए ह्यूमन टचपॉइंट और सेवा को सुगम बनाने के लिए टेक्नोलॉजी का प्रयोग कर रहा भारतीय जीवन बीमा उद्योग 2047 तक सभी के लिए बीमा के सपने को साकार करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

‘2047 तक सभी के लिए इंश्योरेंस’ के इरडा के सपने को साकार करने के लिए रणनीतिक नेतृत्व के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर इनोवेशन की भी जरूरत है। इस दिशा में फिनटेक एवं नियामकों के साथ साझेदारी से यह सुनिश्चित किया जा सकता है कि लंबी अवधि में टिकाऊपन के साथ पर्याप्त अनुपालन भी हो। एआई एवं डाटा एनालिटिक्स के एडवांस्ड स्वरूप का प्रयोग करते हुए और हाइब्रिड डिस्ट्रीब्यूशन मॉडल को अपनाते हुए बीमा कंपनियां विशेष रूप से अब तक बीमा से दूर रह गई आबादी को ध्यान में रखकर समाधान तैयार कर सकती हैं। इसके साथ-साथ एआई पावर्ड टूल्स से एजेंट्स को ग्राहकों की व्यक्तिगत जरूरत के हिसाब से सर्विस देने में मदद मिल सकती है। वहीं हाइब्रिड मॉडल से कृषि से होने वाली आय के हिसाब से प्रीमियम पेमेंट में लचीलेपन का मौका मिलेगा। 

About the author

admin

Add Comment

Click here to post a comment

Topics