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कार्बन न्यूट्रीलिटी टारगेट के प्रति सरकार की उपलब्धि पर जोर

आजादी का अमृत महोत्सव (एकेएएम) सर्कुलर इकोनॉमी अभियान 2023 के तहत, 9वां स्क्रैप रीसाइक्लिंग और अपशिष्ट उपयोग सम्मेलन जयपुर में बुधवार को सफलतापूर्वक संपन्न हुआ, जो रीसाइक्लिंग क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए मल्टी सिटी  जागरूकता कार्यक्रम का एक हिस्सा है। खान और इस्पात मंत्रालय के संयुक्त तत्वावधान में मैटेरियल रीसाइक्लिंग एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एमआरएआई) और जवाहरलाल नेहरू एल्युमीनियम रिसर्च डेवलपमेंट एंड डिजाइन सेंटर (जेएनएआरडीडीसी) द्वारा सस्टेनेबल एण्ड सर्कुलर इण्डिया टुवर्ड्स जीरो वेस्ट इन मेटल्स प्रोसेसिंग ने इस कार्यक्रम की मेजबानी की। सम्मेलन को ग्रेविटा इण्डिया लिमिटेड द्वारा समर्थित किया गया था।

9वें एकेएएम सम्मेलन का उद्घाटन श्री सुग्रीव मीना (आईआरएस), सीमा शुल्क आयुक्त, जयपुर ने किया मुख्य अतिथि, श्री आर पी गुप्ता, निदेशक, एमओएम, डॉ. अनुपम अग्निहोत्री, निदेशक, जेएनएआरडीडीसी और श्री संजय मेहता, अध्यक्ष, एमआरएआई, सीताराम अग्रवाल, अध्यक्ष स्टील चैम्बर ऑफ राजस्थान, एल. पुगझेंथी, कार्यकारी निदेशक, आईएलजेडडीए, नवीन शर्मा, निदेशक, एमआरएआई और रितेश माहेश्वरी, निदेशक, एमआरएआई, नरेश जैन, अध्यक्ष, द एम्प्लॉयर्स एसोसिएशन, राजस्थान सम्मानित अतिथि थे।

9वें एकेएएम सम्मेलन में प्रमुख चुनौतीपूर्ण मुद्दों पर प्रकाश डाला गया, जिसमें सेकेण्डरी सेक्टर्स या स्क्रैप सेक्टर के लिए एक समान अवसर बनाना, रीसाइक्लिंग को बढ़ावा देने के लिए हर राज्य में रीसाइक्लिंग क्षेत्र के लिए एक समर्पित क्षेत्र/रीसाइक्लिंग क्षेत्र, वैश्विक स्तर के अनुरूप स्क्रैप के आयात पर जीरो ड्यूटी शामिल है। उद्योग को व्यवहार्य बनाने और निर्यात को बढ़ावा देने के लिए मानक और अलौह स्क्रैप के आयात पर सीमा शुल्क को कम करना, एकीकृत अपशिष्ट पुनर्चक्रण पार्क मुख्य विषय थे।

आरंभ में एमआरएआई के निदेशक, रितेश माहेश्वरी ने सभी गणमान्य व्यक्तियों का स्वागत किया और सम्मेलन का विषय प्रस्तुत किया और कहा कि एकेएएम सम्मेलन के तहत खान मंत्रालय और इस्पात मंत्रालय की पहल ने रीसाइक्लिंग उद्योग की बेहतरी में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

अपने मुख्य भाषण में मुख्य अतिथि सीमा शुल्क आयुक्त, जयपुर श्री सुग्रीव मीना ने कार्बन न्यूट्रीलिटी टारगेट के प्रति सरकार की उपलब्धि पर जोर दिया और बताया कि कैसे रीसाइक्लिंग उद्योग पर्यावरणीय गिरावट को रोकने में मदद कर सकता है। उन्होंने सीमा शुल्क और उत्पाद शुल्क से संबंधित कार्यक्रम में उठाए गए विभिन्न मुद््दो के बारे में संबोधित किया और बताया कि उन्हें हल करने के लिए वित्त मंत्रालय के साथ एमओएम कैसे काम कर रहा है और सरकार के कानूनों के उचित समय पर कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने में उनकी भूमिका कैसे होगी।

जेएनएआरडीडीसी के निदेशक डॉ. अनुपम अग्निहोत्री ने धातु रीसाइक्लिंग उद्योग के तकनीकी मुद्दो और चुनौतियों के लिए नवीन समाधान स्थापित करने के लिए अकादमिक और उद्योग कनेक्शन के महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि जेएनएआरडीडीसी ने एकेडेमिया-रीसाइक्लिंग इण्डस्ट्री इंटरेक्शन के लिए एक गूगल क्लासरूम बनाया है।

एमआरएआई के अध्यक्ष संजय मेहता ने ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन के प्रतिकूल प्रभाव से बचने के लिए रीसाइक्लिंग उद्योग के प्रति भारत सरकार के दृष्टिकोण पर प्रकाश डाला और कार्बन उत्सर्जन को कम करने के लिए इस्पात मंत्रालय और खान मंत्रालय के किए जा रहे प्रयासों को स्वीकार किया। उन्होंने रीसाइक्लिंग उद्योग के महत्व के बारे में शिक्षित करने और जागरूकता फैलाने के सरकार के दृष्टिकोण को भी स्वीकार करते हुए उन्होंने दृढ़तापूर्वक सिफारिश की कि सरकार को सेकेण्डरी सेक्टर  को बढ़ावा देने के लिए अपनी आवश्यकताओं का न्यूनतम 50 प्रतिशत रीसाइकिलिंग मेटेरियल से निर्मित उत्पादों से खरीदना चाहिए।

वहीं एमआरएआई के निदेशक नवीन शर्मा ने भी राजस्व विभाग, वाणिज्य मंत्रालय और डीजीएफटी, आर्थिक मामलों के विभाग और जीएसटी परिषद सचिवालय को विभिन्न सुझावों की सिफारिश की जिसमें अपशिष्ट स्ट्रीम के बावजूद रीसाइक्लिंग/अपशिष्ट रीसाइकिलिंग उद्योग के लिए समान कराधान व्यवस्था (प्रत्यक्ष कर) सहित विभिन्न आठ सुझाव शामिल हैं।

राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पूर्व सदस्य सचिव डॉ. विजय सिंघल ने सिफारिश की कि प्रत्येक राज्य सरकार को एक एकीकृत अपशिष्ट पुनर्चक्रण पार्क (आईडब्ल्यूआरपी) की अवधारणा को अपनाना चाहिए जिसमें विभिन्न अपशिष्ट धाराओं के पुनर्चक्रणकर्ता एक अच्छी तरह से परिभाषित औद्योगिक क्षेत्र में स्थित हों।

खान मंत्रालय के निदेशक श्री आर पी गुप्ता ने अपने विचार साझा करते हुए कहा “एकेएएम कार्यक्रम उद्योग से मिलने, यहां प्राप्त जानकारी के बड़े पूल के साथ एक कार्य योजना की परिकल्पना करने और बनाने का एक अवसर रहा है। यह मंच इस प्रकार के मुख्य मुद्दों पर काम करेगा और रीसाइक्लिंग उद्योग के निर्बाध कामकाज के लिए एक अनुकूल पारिस्थितिकी तंत्र तैयार करेगा।

राजस्थान स्टील चैम्बर्स, इंडियन इन्स्टीट्यूट ऑफ फाउण्डरीमैन फाउण्ड्री ओनर्स एसोसिएशन, बगरू इंडस्ट्रियल एसोसिएशन, विश्वकर्मा इंडस्ट्रियल एसोसिएशन और द एम्प्लॉयर्स एसोसिएशन ऑफ राजस्थान सहित विभिन्न उद्योग संघों से 200 से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस दो दिवसीय अभियान के दौरान, इस्पात मंत्रालय, खान मंत्रालय के सरकारी अधिकारियों और इंजीनियरिंग कॉलेज के छात्रों के साथ लौह और अलौह संयंत्रों मंगला इस्पात, राजपुताना इंडस्ट्रीज, ब्राइट मेटल्स, ग्रेविटा इंडिया और गंगानगर वाहन उद्योग प्राइवेट लिमिटेड के संयंत्रों का दौरा किया।