टेक्नोलॉजी ने कई लोगों के समक्ष डिजिटल खानाबदोश बनने के रास्ते खोले हैं और लोगों ने फिर दुनियाभर में घूमना शुरू कर दिया है, ऐसे में एचएसबीसी के अध्ययन में सामने आया है कि विदेश से आने वालों यानी इंटरनेशनल सिटिजंस का वित्तीय प्रबंधन को लेकर अनुभव बहुत सुगम नहीं रहता है।
एचएसबीसी के अनुमान के मुताबिक इसके 10 अहम मार्केट्स में 9 करोड़ से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय उपभोक्ता हैं, जो रहने, काम करने या पढ़ाई करने के लिए विदेश में रह रहे हैं। बैंक ने ऐसे इंटरनेशनल सिटिजंस की वित्तीय व्यवस्था को समझने, नए देश में बसने की उनकी प्रेरणा को जानने और दूसरे देश में बसने पर आने वाली चुनौतियों को समझने के लिए अपने विभिन्न मार्केट्स में अध्ययन किया है। अध्ययन से उनके समक्ष आने वाली वित्तीय चुनौतियों, जगह बदलने के दबाव और इससे उनके जीवन पर संभावित असर के बारे में निष्कर्ष मिले हैं।
अध्ययन के निष्कर्षों पर एचएसबीसी में रिटेल बैंकिंग एंड स्ट्रेटजी, वेल्थ एंड पर्सनल बैंकिंग ग्रुप हेड तायलन तुरान ने कहा,‘विदेश में जाना रोमांचक और चुनौतीपूर्ण है, लेकिन ऐसे में वित्तीय प्रबंधन के लिए संघर्ष करने की नौबत नहीं आनी चाहिए। हमारे शोध से यह स्पष्ट है कि कुछ लोग वित्तीय मोर्चे पर फंस जाते हैं, जिससे वास्तव में नई जगह बसने की उनकी क्षमता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। मल्टीपल लोकेशन बैंकिंग की अपनी चुनौतियां हैं और इसे लेकर बहुत कुछ सोचना-समझना होता है। सफलतापूर्वक बसने के लिए लोगों को विदेश जाने से पहले एक बैंक खाता खोलने और अपने बैंक खातों को एक वैश्विक दृष्टि से देखने में सक्षम होने की आवश्यकता है। बैंकिंग के अलावा विदेश में बसने की स्थिति में टैक्स भी लोगों को परेशान कर सकता है, इसलिए टैक्स प्लानिंग एडवाइजर से मदद लेना भी अहम है। सही फाइनेंशियल सपोर्ट मिले तो इन सब मामलों की चिंता के बजाय उन्हें नए जीवन का आनंद लेने के लिए ज्यादा समय मिलता है।‘
एचएसबीसी इंडिया के वेल्थ एंड पर्सनल बैंकिंग हेड संदीप बत्रा ने कहा, ‘कई बार किसी दूसरे देश में जाने पर वित्तीय प्रबंधन का तनाव विदेश जाने का सारा उत्साह कम कर देता है। इस शोध के माध्यम से हम इंटरनेशनल सिटिजंस के सामने आने वाली अलग-अलग तरह की वित्तीय चुनौतियों को समझने में सक्षम हुए हैं। कई अनिवासी भारतीय (एनआरआई) और विदेश जाने की तैयारी कर रहे भारतीयों को नए देश में आसानी से बसने के लिए वहां कई तरह के वित्तीय सहयोग की आवश्यकता होती है। इसी तरह, जो लोग भारत आए हैं या आने की योजना बना रहे हैं, उनके लिए भी इन चुनौतियों का सामना करना मुश्किल है। शोध से सामने आई चुनौतियां वैश्विक वित्तीय संस्थानों के लिए एक अच्छा अवसर हो सकती हैं, ताकि वे इनके आधार पर बेहतर एवं इनोवेटिव समाधान दे सकें।‘













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