सासाकावा-इंडिया लेप्रोसी फाउंडेशन (एस-एलआईएफ) ने आज युवाओं के बीच कुष्ठ के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए नेशनल यूथ फेस्टिवल के तहत ‘यूथ अगेन्स्ट लेप्रोसी’ का आयोजन किया। यूथ फेस्टिवल का आयोजन नई दिल्ली में इंडिया इस्लामिक कल्चरल सेंटर में किया गया। इस दौरान मुख्य अतिथि के रूप में सीआईआई के महानिदेशक श्री चंद्रजीत बैनर्जी उपस्थित रहे। 9वां यूथ अगेन्स्ट लेप्रोसी (वाईएएल) का आयोजन नेशनल यूथ फेस्टिवल के फाइनल के रूप में किया गया, जिसमें देशभर के कॉलेजों के छात्रों ने हिस्सा लिया और प्रशिक्षण भी प्राप्त किया। उत्सव में युवाओं की सक्रिय सहभागिता दिखी, जिन्होंने इसे सफल बनाने के लिए विभिन्न गतिविधियों में हिस्सा लिया।
इस अवसर पर श्री सैयद इमाम, सदस्य, बोर्ड ऑफ ट्रस्टी, सासाकावा-इंडिया लेप्रोसी फाउंडेशन ने कहा, “यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि भारत के युवाओं को कुष्ठ रोग से जुड़े मिथकों के बारे में बहुत कम या लगभग नहीं के बराबर जानकारी है, जिससे कुष्ठ से प्रभावित लोगों और उनके परिवारों से छुआछूत व भेदभाव को बढ़ावा मिलता है। उन्हें बहुत कम जानकारी होती है और अक्सर अस्पष्ट जानकारी होती है, जिससे बीमारी को लेकर छुआछूत को प्रश्रय मिलता है। फाउंडेशन में हम युवाओं को संवेदनशील बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं ताकि वे इस बात को आगे बढ़ाएं और इस छुआछूत को खत्म करने की दिशा में बेहतर एवं समावेशी समाज के निर्माण में सहयोग कर सकें। हम उम्मीद करते हैं कि सासाकावा-इंडिया लेप्रोसी फाउंडेशन की नई पहल द यूथ फेस्टिवल के माध्यम से क्षेत्रीय और राष्ट्रीय दोनों स्तरों पर हर साल अधिक से अधिक युवाओं तक पहुंचेंगे। अब तक हमने एस-आईएलएफ में कॉलेजों और स्कूलों के 12000 से अधिक छात्रों को प्रशिक्षित किया है और हमारे जागरूकता सत्रों व युवा महोत्सवों के माध्यम से 17 लाख से अधिक युवाओं तक पहुंचे हैं।”
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सासाकावा-इंडिया लेप्रोसी फाउंडेशन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री गौरव सेन ने कहा, “आमतौर पर युवा पीढ़ी में कुष्ठ रोग के बारे में बहुत कम या कोई समझ नहीं है। वे जो कुछ भी जानते हैं वह परिवार और दोस्तों से ही उन्हें पता चलता है और अक्सर यह जानकारी अस्पष्ट होती है और बीमारी के प्रति छुआछूत को बढ़ावा देती है। यदि युवा कम उम्र में ही संवेदनशील हो जाएं, तो वे कुष्ठ उन्मूलन की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं जो कि अंतिम लक्ष्य है। इसी सोच और दृष्टिकोण के साथ एस-आईएलएफ अपने विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से युवाओं को जोड़ता है और उन्हें कुष्ठ रोग के खिलाफ लड़ाई में शामिल होने के लिए प्रेरित करता है। साथ ही, कुष्ठ पृष्ठभूमि वाले युवाओं को प्रेरित करने के लिए हम उन्हें अपने शिक्षा कार्यक्रम के तहत प्रशिक्षण देते हैं और मुझे यह बताते हुए बहुत खुशी हो रही है कि ये युवा बहुत अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं।”













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