बढ़ता हुआ प्रदूषण, खेती में खतरनाक उर्वरकों के उपयोग, गतिहीन जीवन शैली एवं बढ़ते हुए तनाव के कारण भारत में बीमारियों में बहुत ज्यादा बढ़ोतरी हुई है। कई बार दवाइयाँ सिर्फ लक्षणों को खत्म करने का काम करती हैं और बीमारी को पूरी तरह से खत्म नहीं कर पातीं हैं। इसीलिए ये बहुत जरूरी है कि हमें एक ऐसी वैज्ञानिक रूप से समर्थ एक प्राकृतिक चिकित्सा मिल सके जो बीमारियों को जड़ से खत्म करने में मदद कर सके। गामा ओरिजनोल एक ऐसा ही अद्भुत प्राकृतिक तत्व है और हर भारतीय की जरूरत है गामा ओरिजनोल चावल के चोकर में मौजूद सबसे महत्वपूर्ण पोषक तत्व है और इसकी सही खुराक में सेवन करने से अनेकों शारीरिक लाभ मिलते हैं। भारत सरकार की संस्था एफ.एस.एस.ए.आई ने वर्ष 2016 में अनुमोदित न्यूट्रास्यूटिकल्स की सूची में गामा ओरीजनोल को वर्गीकृत किया है
भारत की जानीमानी नूट्रिशनिस्ट ईशा वशिष्ट कहती हैं की दुनिया भर में दिल के दौरे से हो रही मौतों में तेज वृद्धि देखी गई है खासकर युवा लोगों में भी दिल का सबसे बड़ा दुश्मन खराब कोलेस्ट्रॉल है, जो हमारी धमनियों में जमा हो जाता है। गामा ओरिजनोल हमारे खून में मौजूद खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करता है और इसके इस फायदे के चलते इसे जापान और अमेरिका में बढ़े हुए कोलेस्ट्रॉल के स्तर के इलाज यानि उसे कम करने के लिए एक प्राकृतिक दवा के रूप में पंजीकृत किया गया है डायटीशियन ईशा वशिष्ट कहती हैं गामा ओरिजनोल हर भारतीय की जरूरत है क्योंकि आज के समय में हम सब नई स्वास्थ्य आपदाओं का सामना कर रहे हैं, और ऐसे में इम्युनिटी की कमी होना एक वैश्विक डर के रूप में सामने आया है। गामा ओरीजनोल हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्युनिटी) को मजबूत करने में काफी फायदेमंद साबित हुआ है। ऐसे अध्ययन सामने आए हैं जो कोविड रोगियों में साइटोकिन स्ट्रोम (फेफड़ों की सूजन) को रोकने के लिए गामा ओरीजनोल को एक संभावित एजेंट के रूप में लेने की सलाह दी गई ।“
गामा ओरिजनोल में प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट गुण हैं, जो हमारे शरीर में मुक्त कणों (फ्री रैडिकल) से होने वाले नुकसान से लड़ने में मदद करते हैं, जिससे हम कई बीमारियों से सुरक्षित रहते हैं। कई अध्ययनों से यह भी पता चलता है कि विटामिन ई की खुराक की तुलना में गामा ओरिजनोल टिशू ऑक्सीडेशन को रोकने में 4 गुना अधिक प्रभावी है।यह एक व्यापक रूप से ज्ञात तथ्य है कि गठिया, ऑटोइम्यून रोग, तंत्रिका संबंधी रोग, फेफड़े और हृदय संबंधी बीमारियाँ आदि जैसे विकारों का सूजन मुख्य कारण है।गामा ओरिजनोल सूजन-संबंधी कई बीमारियों को ठीक करता है और ऐसी अनेकों बिमारियों से हमें बचाता है।
गामा ओरिजनोल एक कैंसर रोधी एजेंट के रूप में भी कार्य करता है, क्योंकि इसमें साइक्लोआर्टेनॉल फेरुलेट नामक एक यौगिक होता है, जो मूल रूप से नैचुरल किलर सेल्स का एक उत्प्रेरक होता है तथा ये कोशिकाएँ कैंसर कोशिकाओं को नियंत्रण में रखती हैं, अर्थात यह उन्हें बढ़ने नहीं देती हैं अगर एक्सपर्ट्स की माने तो गामा ओरिजनल का सेवन बहुत गुणकारी है और हर एक भारतीय को एक बेहतर स्वस्थ के लिए इसे लेना चाहिए ।













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