यूजी कोर्स की तैयारी के लिए लीडिंग कोचिंग सेंटर में शुमार प्रथम टेस्ट प्रेप ने क्लैट (CLAT) और आईलेट (AILET) एस्पीरेंट्स के लिए ऑल इंडिया ओपन मॉक टेस्ट का आयोजन किया है. ये टेस्ट ऑफलाइन आयोजित किया गया. इस नेशनल लेवल मॉक टेस्ट एग्जाम का मकसद छात्रों को क्लैट और आईलेट के लिए तैयार करना था, ताकि वो अच्छी रैंक और परसेंटाइल पा सकें.
इस टेस्ट में हिस्सा लेने वाले प्रतिभागियों को जीके क्रोनिकल्स का फ्री एक्सेस भी दिया गया. जीके क्रोनिकल्स में मंथली जीके पीडीएफ होती है जिसमें 300 जीके पैसेज, 1500 एमसीक्यू होते हैं. इसके अलावा प्रतिभागियों को लीगल सेक्शन की तैयारी के लिए इससे संबंधित बूस्टर पीडीएफ का भी एक्सेस दिया जाता है. इस एग्जाम में नेशनल लेवल पर टॉप तीन रैंक पाने छात्रों को आईपैड दिए गए जबकि हर जोन के टॉपर को 15 हजार रुपये का मोबाइल फोन दिया गया. इनके साथ ही बाकी टॉप 30 प्रतिभागियों को प्रथम लॉ टेस्ट प्रेप मॉक टेस्ट सीरीज सिर्फ एक रुपये में दी गई.
ये पैन इंडिया एग्जाम देश के अलग-अलग शहरों में 8 जोन में आयोजित किया गया. दिल्ली, जयपुर, लखनऊ, चंडीगढ़ और पुणे समेत कई और शहरों में ये एग्जाम ठीक उसी फॉर्मेट में कराया गया जैसे रियल क्लैट परीक्षा कराई जाती है. दिल्ली के डीएवी पब्लिक स्कूल-दयानंद विहार, डीएवी पब्लिक स्कूल-पुष्पांजलि एन्क्लेव, ब्लूबेल्स इंटरनेशनल स्कूल और पूसा रोड के स्प्रिंगडेल्स स्कूल समेत कई स्थानों पर परीक्षा आयोजित की गई थी.
इस मौके पर प्रथम टेस्ट प्रेप के डायरेक्टर अंकित कपूर ने कहा, ‘’किसी भी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए मॉक टेस्ट देना काफी ज्यादा महत्वपूर्ण होता है. क्लैट के मामले में भी ऐसा ही होता है. छात्रों के लिए ये जरूरी है कि वो रियल एग्जाम में बैठने से पहले कम से कम 10-12 मॉक टेस्ट में बैठे. यही कारण है कि ये पैन इंडिया मॉक टेस्ट कराया गया ताकि बच्चों को रियल एग्जाम का एक्सपीरियंस कराया जा सके. जिसके हिसाब से छात्र अपने एग्जाम की रणनीति बना सकें और सफलता की कहानी लिख सकें.’’
ये मॉक टेस्ट पूरी तरह वैसे ही कराया गया, जैसे रियल में क्लैस एग्जाम होता है. छात्रों से वही सब नियम फॉलो कराए गए जो रियल एग्जाम में होते हैं. डेस्क पर उनकी चेकिंग की गई, ओएमआर शीट कलेक्ट की गईं. इसके बाद जिन छात्रों ने भी एग्जाम दिया था, उनके विश्लेषण के साथ आंसर शीट दी गई, उसमें उनकी नेशनल रैंक और परसेंटाइल बताया गया. इस एग्जाम के बाद एक सेक्शन वाइज़ मॉक सेशन भी किया गया. ये लाइव था, इसमें छात्रों से उनकी परेशानियों के बारे में डिस्कस किया गया और उन्हें बताया गया कि एग्जाम के लिए क्या बेहतर स्ट्रैटेजी हो सकती है. साथ ही छात्रों को उनकी वीकनेस और स्ट्रैंथ के हिसाब से अपनी चीजें सुधारने के लिए भी प्रेरित किया गया.
ये मॉक टेस्ट पिछले क्लैट एग्जाम के पैटर्न और एनएलएसआईयू द्वारा जारी सैम्पल पेपर्स पर आधारित था. इससे न सिर्फ छात्रों को सिलेबस के बारे में जानकारी हासिल हुई बल्कि उन्हें एग्जाम के पैटर्न और सवालों के रूबरू होने का रियल टाइम एक्सपीरियंस भी हुआ.













Add Comment