Business Featured

विश्व हृदय दिवस पर रुक्मणी  बिरला हॉस्पिटल का जागरूकता कार्यक्रम

हर साल 29 सितंबर को विश्व हृदय दिवस मनाया जाता है। इसका उद्देश्य है कि आमजन को हृदय संबंधित बीमारियों के बारे में जागरुक किया जा सके। इस बार विश्व हृदय दिवस की थीम है, ‘कार्डियोवैस्कुलर हेल्प फॉर एवीरवन’ यानि कि हर व्यक्ति के लिए बेहतर हृदय स्वास्थ्य। जैसा कि सब लोग जानते हैं कि हृदय रोगों में सबसे आम बीमारी है कोरोनरी आर्टरी डिजीज मतलब हृदय की धमनियों में रुकावट। आमतौर पर इसके इलाज के लिए धमनियों में रुकावट की जगह स्टेंट लगाए जाते हैं। स्टेंट की शुरूआत से लेकर वर्तमान तक इसकी तकनीक काफी बेहतर हुई है और इससे हार्ट की धमनियों में रुकावट का इलाज काफी सुगम हो गया है। विश्व हृदय दिवस के अवसर पर रुक्मणी  बिरला हॉस्पिटल के कार्डियोलॉजी विभाग के एडिशनल डायरेक्टर डॉ. सुनील बेनीवाल हमें स्टेंट्स के प्रकारो के बारे में जानकारी दे रहे हैं।

पहली बार 1986 में फ्रांस में लगाया गया था स्टेंट —  

डॉ. सुनील बेनीवाल ने बताया कि सभी स्टेंट एक तरह के नहीं होते हैं। 28 मार्च 1986 को फ्रांस में पहली बार मनुष्य की धमनियों में स्टंट लगाया गया था तब से अब तक के डिजाइन और टाइप में बहुत विकास हो गया है। आज के समय में विभिन्न प्रकार के स्टेंट उपलब्ध हैं |

1 . बेयर मेटल स्टेंट (बीएमएस): शुरूआत में इसी तरह के स्टेंट आते थे। यह स्टेंट रुकावट वाली जगह को खुली अवस्था में रखने में कारगर था परंतु वर्तमान समय में बेयर मेटल स्पेस मेटल स्टेंट हृदय की धमनियों में ना के बराबर उपयोग होते हैं।

2. ड्रग इल्युटिंग स्टेंट (डीईएस) या मेडिकेटेड स्टेंट: यह स्टेंट बीएमएस से उन्नत किस्म के हैं । इसमें स्टेंट के साथ मेडिसिन भी होती है जो ब्लॉकेज को दोबार बनने से रोकती है। शुरूआती डीईएस को फर्स्ट जनरेशन डीईएस कहते हैं। लेकिन समय के साथ तकनीक, बनावट और दवाइयों के साथ बदलाव आते गए। उन्नत और विकसित तरह के स्टेंट्स को करंट जनरेशन स्टेंट कहते हैं। इसमें भी बहुत सी वैरायटी होती है एवं हर स्टेंट की भी अपनी एक विशेषता होती है। करंट जनरेशन स्टेंट बहुत सी रिसर्च में पुराने स्टेंट के मुकाबले अधिक प्रभावी सिद्ध हुए हैं।

3. बायोएब्सोर्बेबल स्टेंट (घुलने वाले स्टेंट): यह एक नए तरह के स्टेंट हैं जिसमें स्टेंट कुछ समय बाद शरीर में ही घुलकर गायब हो जाता है। इस तरह के कुछ  स्टेंट मनुष्य में  उपयोग होने लगे हैं। इस तरीके के स्टेंट भविष्य के लिए और अधिक विकसित करने के लिए मेडिकल फील्ड में बहुत सारी रिसर्च हो रही है। सबकी नजरें इन रिसर्च के परिणामों पर ही टिकी हुई है।

देशों की ड्रग क्वालिटी कंट्रोलर संस्थाएं देती हैं मान्यता —    

स्टेंट के साथ हुई रिसर्च एवं मेडिकल डाटा के आधार पर यूएसएफडीए (अमेरिकन संस्था), डी सी जी आई  (भारतीय संस्था) जैसी संस्थाएं विभिन्न प्रकार के स्टेंट को विभिन्न परिस्थितियों में उपयोग के लिए मान्यता देती है। इस प्रकार से कोरोनरी स्टेंट ने कोरोनरी आर्टरी डिजीज के उपचार में बहुत योगदान दिया है। समय के साथ-साथ इन स्टेंट्स की तकनीक एवं बनावट में बहुत सुधार हुआ है। भविष्य में और भी अच्छी गुणवत्ता के स्टेंट्स आने की उम्मीद है जो उपचार को और भी सरल एवं सफल बनाएंगे। 

Topics