ब्रेन में पिट्यूटिरी ग्लैंड में हुई गांठ से जूझ रही महिला के लिए मातृत्व का सुख पाना कभी पूरा न होने वाला सपना बन चुका था। लेकिन शहर के डॉक्टर्स के बेहतरीन क्लीनिकल मैनेजमेंट की बदौलत, हाई रिस्क प्रेग्नेंसी के बावजूद महिला मां बन पाई और उनके घर में नन्हीं किलकारियां गूंज उठीं। शहर के रूक्मणी बिरला हॉस्पिटल में हुए इस केस में महिला की हाई रिस्क प्रेग्नेंसी सफलतापूर्वक पूरी कर ली गई। हॉस्पिटल की सीनियर गायनोकोलॉजिस्ट डॉ. नम्रता गुप्ता व टीम ने यह केस किया।
दरअसल, पेशेंट आगरा की थी। लंबे समय तक अलग-अलग चिकित्सकों से इलाज लेने के बावजूद उनका उपचार नहीं हो पा रहा था इसलिए वह जयपुर के रुक्मणी बिरला हॉस्पिटल आई । उनकी जांच में सामने आया कि उन्हें पिट्यूूटिरी एडिनोमा ब्रेन ट्यूमर था। इस ट्यूमर के ईलाज के लिये मरीज की पहले भी दूसरे अस्पताल में सर्जरी हो चुकी थी। इसके बाद भी वह ट्यूमर दोबारा हो गया था।
डॉ नम्रता गुप्ता ने जानकारी दी कि ऐसे केसों में आमतौर पर गर्भधारण नहीं होता है अतः लोग आईवीएफ की तरफ जाते है परन्तु हमने बिना आईवीएफ के सामान्य प्रक्रिया के जरिये दवाओं से प्रेग्नेंसी होने का इलाज किया। इन मरीजों को सिर दर्द, आंखों में दर्द, दिखने में समस्या, जी घबराना व चक्कर आना जैसी समस्याएँ होती है जिसके लिये मरीज को काफी ऑब्जर्व किया एवं काफी मॉनिटरिंग करके उसे प्रेगनेंसी कंसीव करवाई। इसे प्रेशियस प्रेगनेंसी कह सकते हैं क्योंकि यह एक हाई रिस्क प्रेगनेंसी थी व इसमें मल्टीस्पेशलिटी सुविधाओं, आईसीयू व न्यूरो मॉनिटरिंग की आवश्यकता थी। इस मरीज को डिलीवरी व ईलाज के लिये आगरा से जयपुर रैफर कर दिया गया। मरीज के लिये आवश्यक सभी इकाइयों के डॉक्टर्स से विचार विमर्श कर इलाज किया गया तथा आठवें महीने पर समय से पहले डिलीवरी के सभी रोग निरोधक सावधानियो को ध्यान में रखते हुए डिलीवरी करवाई गयी।
हॉस्पिटल के नियॉनोटोलॉजिस्ट डॉ. विवेक गुप्ता ने शिशु को अपनी मॉनिटरिंग में रखा। डॉ. विवेक ने बताया चूकि बच्चे का जन्म असामयिक अवधि (33 सप्ताह) पर हुआ था अत: हमने तय किया कि बच्चे को एनआईसीयू में रखना सेफ होगा। बच्चे को सांस की तकलीफ थी साथ ही असामयिक अवधि (प्रीमेच्योर डिलीवरी) की वजह से दूध पचाने में भी दिक्कत थी ,बच्चे को सी पेप मशीन पर रखा गया तथा टीपीएन दिया गया इसके बाद बच्चे को नर्सरी में रखा गया पर अब माँ एवं बच्चा दोनों स्वस्थ हैं।
गर्भधारण होता है मुश्किल —
हॉस्पिटल के सीनियर एंडोक्राइनोलॉजिस्ट डॉ. अंकुर गहलोत ने बताया कि इस ट्यूमर के कारण प्रेगनेंसी बहुत मुश्किल से होती है। ट्यूमर के कारण ऐसे हार्मोन स्रावित होते हैं, जिसमें गर्भ धारण करना मुश्किल होता है। प्रेगनेंसी में इस ट्यूमर के बढ़ने का भी खतरा रहता है अतः दवाइयों द्वारा इस प्रोलक्टीनोमा ट्यूमर पर नियंत्रित रखा जाता है।













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