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एलि लिली ने भारत में पेश की रैमीवेन

एलि लिली एंड कंपनी (इंडिया) प्राइवेट लिमि. (”लिली’’इंडिया) ने भारत के औषधि महानियंत्रक से मंजूरी के बाद रैमीवेन (एबेमास्किलिब) का अतिरिक्‍त इंडिकेशन लॉन्‍च करने की घोषणा की है। इसका इस्‍तेमाल हार्मोन रिसेप्‍टर पॉज़िटिव, ह्यूमैन एपिडर्मल ग्रोथ फैक्‍टर रिसेप्‍टर 2(HER2) निगेटिव, नोड-पॉज़िटिव अर्ली ब्रैस्‍ट कैंसर जिन्‍हें दोबारा कैंसर होने का खतरा है, वयस्‍क मरीज़ों के लिए एंडोक्राइन थेरेपी के मेल से एडज्‍यूवेंट उपचार के लिए किया जाता है।

सीडीके  4/6 इंहिबिटर्स दवाओं की ऐसी श्रेणी है जिसका इस्‍‍तेमाल कुछ खास प्रकार के मेटास्‍टेटिक ब्रैस्‍ट कैंसर के इलाज में किया जाता है। भारत में, हर साल 50,000 से अधिक मरीज़ों में अर्ली ब्रैस्‍ट कैंसर (ईबीसी) का पता चलता है। इनमें करीब 30 प्रतिशत  ईबीसी मरीज़ में हाइ-रिस्‍क क्‍लीनिकल अथवा पैथोलॉजिकल फीचर्स दोबारा सामने आते हैं या मानक उपचार मिलने के बावजूद इन मरीज़ों में मेटास्‍टेटिस देखा गया है।

विनीत गुप्‍ता, प्रबंध निदेशक, एली लिली एंड कंपनी – भारत एवं भारतीय उपमहाद्वीप ने कहा, ब्रैस्‍ट कैंसर भारत में महिलाओं को सबसे ज्‍यादा शिकार बनाने वाला कैंसर है। यह कैंसर सरवाइवर्स और उनके परिवारों के जीवन की गुणवत्‍ता को काफी प्रभावित करता है, जो हमेशा इस रोग के दोबारा उत्‍पन्‍न होने के डर के साए में जीते हैं। अर्ली ब्रैस्‍ट कैंसर के इलाज के लिए रैमीवेन को मंजूरी मिलने से मरीज़ों की देखभाल करने वाले हैल्‍थकेयर प्रोफेशनल्‍स को उम्‍मीद की नई किरण दिखायी दी है।”

रैमीवेन को कुछ खास प्रकार के एचआर+एचईआर2 एडवांस्‍ड या मैटास्‍टेटिक ब्रैस्‍ट कैंसर के इलाज के लिए पहले ही मंजूरी मिल चुकी है। रैमीवेन एक प्रेस्क्रिप्‍शन औषधि है जिसका इस्‍तेमाल सिर्फ ओंकोलॉजिस्‍ट की सलाह पर चिकित्‍सकीय देखरेख में ही किया जाना चाहिए। यह 200 मिग्रा, 150 मिग्रा, तथा 50 मिग्रा की टैबलेट रूप में उपलब्‍ध है।