Featured Health Care

विश्व दृष्टि दिवस: अत्यधिक स्क्रीन टाइम भी आंखों की दृष्टि को प्रभावित करता है

सबसे ज्यादा स्मार्टफोन इस्तेमाल करने वालेटॉप तीन देशों में से भारत एक है। वहीं, 1 करोड़ लोग रेटिना संबंधी बीमारियों से ग्रसित हैं। रेटिना के अच्छे स्वास्थ्य के लिये सबसे महत्वपूर्ण चीज है, एक ऑप्टोमेट्रिस्ट या नेत्र रोग विशेषज्ञ से नियमित रूप से आंखों की जांच करवाना, यह बीमारियों को रोकने में मदद कर सकता है या प्रारंभिक अवस्था में स्थितियों का पता लगाने में मदद कर सकता है। इससे सही उपचार के साथ-साथ समय पर बीमारी का प्रबंधन करने और आंखों के देखने की क्षमता कम होने से रोकने में सहायता मिल सकती है। उम्र से संबंधी मैक्यूलर डिजेनरेशन (एएमडी) और डायबिटिक रेटिनोपैथी (डीआर) जैसे रोग सही समय पर प्रबंधित नहीं होने पर महत्वपूर्ण दृष्टि हानि का कारण बन सकते हैं। डॉ. विशाल अग्रवालसीनियर आई स्पेशिलस्ट एवं विट्रियो रेटिनल सर्जनसेक्रेटरीजयपुर नेत्र रोग सोसायटीका कहना है, “दुनिया में अंधेपन और दृष्टिदोष के कुल बोझ का महत्वपूर्ण हिस्सा भारत का है। लगभग 90% दृष्टि हानि रोकने योग्य या उपचार योग्य होती है। अपने आंखों की सेहत पर निवेश करने से गुणवत्तापूर्ण जीवन, आर्थिक मजबूती और शैक्षिक उपलब्धि में सुधार होता है। आंखों की अच्छी रोशनी विकास के पूर्ण लक्ष्य को पाने के लिये महत्वपूर्ण है।” वह आगे कहते हैं, “दृष्टि हानि के मुख्य कारणों में अनकरेक्टेड रेफ्रेक्टिव एरर (चश्मे का उपयोग न करना), मोतियाबिंद, ग्लूकोमा और रेटिनल रोग जैसे डायबिटिक रेटिनोपैथी और उम्र से संबंधित मैक्यूलर डिजेनरेशन हैं। इन रोगों में समय पर पता लगना और उपचार जरूरी है, जिसके विफल होने की वजह से अपरिवर्तनीय दृष्टि हानि हो सकती है। डायबिटीज के रोगियों, बच्चों और बुजुर्गों के लिये नियमित आंखों की जांच, जल्द पता लगाने और कम से कम दृष्टि हानि में सहायता मिल सकती है। फिलहाल, सबसे बड़ी चुनौती निवारक और उपचारात्मक गुणवत्ता नेत्र स्वास्थ्य देखभाल सेवाओं को ज्यादातर लोगों के लिय सुलभ और सस्ता बनाना है। सरकार अपने कई प्रमुख कार्यक्रमों के माध्यम से इस बड़े काम को करने में मदद कर रही है।” अत्यधिक स्क्रीन टाइम की वजह  से आंखों से जुड़ी समस्याएं, ड्राई आइज़, लंबे समय तक स्क्रीन देखते रहने के कारण हम आवश्यकतानुसार पलकें नहीं झपका पाते। यह आंखों की सतह की रक्षा करने वाले आंसुओं की परत को एक्सपोज करता है और सूखेपन और जलन का कारण बनता है। आंखों की थकान , अस्थेनोपिया, ऑक्यूलर फैटीग या आंखों की थकान एक ऐसी समस्या है, जहां आंखें ज्यादा उपयोग से थक जाती हैं। यह लंबे समय तक कंप्यूटर स्क्रीन या स्मार्टफोन को देखते रहने का एक सामान्य प्रभाव है और आसानी से दूर हो सकता है। एज-रिलेक्टेड मैक्यूलर डिजेनरेशन (एएमडी), एएमडी केंद्रीय दृष्टि को प्रभावित करता है और वृद्ध लोगों में काफी आम है। चूंकि, स्क्रीन से नीली रोशनी के अत्यधिक संपर्क में आने से रेटिना को नुकसान पहुंचता है, यह एएमडी की शुरूआत है और अंततः दृष्टि की हानि को ट्रिगर करता है। हालांकि, जल्दी एएमडी का पता लगाकर, आप इस स्थिति के लिये प्रभावी उपचार पा सकते हैं और दृष्टि हानि के रोके जाने योग्य परिणाम से बच सकते हैं।

निकट दृष्टिदोष मायोपिया या निकट दृष्टिदोष एक ऐसी समस्या है, जहां दूर की चीजें देखने में परेशानी होती है या वह धुंधला दिखता है, वहीं पास की चीजें साफ नजर आती हैं। घर के अंदर रहने और लंबे समय तक स्क्रीन को देखने से आपकी आंखों का फोकस आपके हाथ की लंबाई जितना रह जाता है, जिसकी वजह से आपको निकट दृष्टिदोष का खतरा हो सकता है।  स्क्रीन टाइम की वजह से ड्राई आइज़, फोकस करने में परेशानी और आंखों से जुड़ी अन्य समस्याएं, आंखों की मांसपेशियों पर बोझ पड़ने की वजह से होती हैं। यहां कुछ ऐसी बातें दी गई हैं, जो आपकी आंखों को स्वस्थ रख सकती हैं: आंखों को झपकाना और हाइड्रेशन आईड्रॉप का इस्तेमाल, ड्राई आइज़ की समस्या से बचा सकता है। सिर के ऊपर की रोशनी को इस तरह से एडजस्ट करें कि स्क्रीन की चमक कम से कम हो और कंप्यूटर स्क्रीन से कम से कम एक हाथ की दूरी रखें।  स्ट्रेन को कम करने के लिये कंटेंट का आकार बढ़ा लें और हर 30-40 मिनट बाद ब्रेक लें।  इस साल, 13 अक्टूबर को, विश्व दृष्टि दिवस (वर्ल्‍ड साइट डे) मनाया गया है और इसका लक्ष्य जागरूकता फैलाना और लोगों को आंखों की सेहत को महत्व देने के लिये प्रोत्साहित करना है। सुरक्षात्मक कदम उठाने, नियमित जांच और समय पर उपचार मददगार हो सकता है। अपने स्क्रीन टाइम का ध्यान रखना ना भूलें और साथ ही अपनी आंखों तथा पूरे शरीर को स्वस्थ रखने के लिये एक सेहतमंद और एक्टिव लाइफस्टाइल बनाए रखें।