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संवाद, संयम और सौहार्द के संदेश के साथ संपन्न हुई चतुर्थ वीजीयू आर.के. रस्तोगी मेमोरियल प्रतियोगिता

विवेकानंद ग्लोबल यूनिवर्सिटी (वीजीयू) के विधि विभाग द्वारा आयोजित राष्ट्रीय स्तर की “चतुर्थ वीजीयू आर.के. रस्तोगी मेमोरियल नेगोशिएशन प्रतियोगिता” का रविवार, 25 अक्टूबर को विश्वविद्यालय केमुख्यसभागार में गरिमामय वातावरण में भव्य समापन हुआ। देश के अग्रणी विधिक संस्थानों, राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालयों और विधि संकायों की 60 टीमों के बीच आयोजित इस प्रतियोगिता का शुभारंभ शनिवार को वैकल्पिक विवाद समाधान, संवाद और सुलह की भावना अपनाने के संदेश के साथ हुआ था। प्रतियोगिता के दूसरे और अंतिम दिन कॉरपोरेट, सिविल और वाणिज्यिक विवादों के काल्पनिक परिदृश्यों पर आधारित चरणों में प्रतिभागियों ने वार्ता कौशल, तर्कशक्ति, धैर्य और सौहार्दपूर्ण समाधान की अपनी क्षमता का शानदार प्रदर्शन किया।

समापन समारोह की शुरुआत मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथि और विश्वविद्यालय के शीर्ष प्रबंधन के आगमन के साथ दीप प्रज्वलन और सरस्वती वंदना से हुई, जिसके बाद अतिथियों का पुष्पगुच्छ और स्मृति चिह्न भेंट कर स्वागत किया गया। स्वागत भाषण में वीजीयू के प्रेसिडेंट प्रो. (डॉ.) डी.वी.एस. भगवानुलु ने सभी अतिथियों, निर्णायकों और प्रतिभागियों का अभिनंदन करते हुए विश्वविद्यालय द्वारा व्यावहारिक विधिक शिक्षा को बढ़ावा देने के प्रयासों की जानकारी दी और कहा कि नेगोशिएशन हमारे जीवन का भाग है जिससे काफ़ी परेशानी को हल किया जा सकता है। उन्होंने आगे कहा कि ऐसे राष्ट्रीय मंच विद्यार्थियों को कक्षा से आगे बढ़कर वास्तविक कौशल सीखने का अवसर देते हैं।

वरिष्ठ अधिवक्ता एवं आयोजन के संरक्षक राजदीपक रस्तोगी ने स्वर्गीय आर.के. रस्तोगी के आदर्शों का स्मरण करते हुए कहा कि यह प्रतियोगिता केवल हार-जीत का मंच नहीं, बल्कि विधिक मूल्यों और नैतिक आचरण को अपनाने की प्रेरणा है, आर के रस्तोगी जी के विचारो का स्मरण करते हुए उनके द्वारा किए गए समाज और विधि क्षेत्र में उनके अमूल्य योगदान की प्रशंसा की, उन्होंने आगे नेगोशिएशन को त्रेता और द्वापर युग में घटी घटनाओं से जोड़ा और बताया अगर उस समय नेगोशिएशन सफल रहा होता तो इतने बड़े युद्ध ना हुए होते। समारोह के विशिष्ट अतिथि, पूर्व आईएएस अधिकारी तथा सच बेधड़क मीडिया समूह, जयपुर के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक पवन अरोड़ा ने युवा विधि विद्यार्थियों को संबोधित किया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा नेगोशिएशन एक सकारात्मक पक्ष है समाज को इसकी बेहद आवश्यकता है नेगोशिएशन एक समाधान है ना की यह हार जीत का तत्व है आगे उन्होंने लॉ के विद्यार्थियों से कहा कि आप जिस भी भूमिका में रहे सदैव सेवा, त्याग और समर्पण से कार्य करें जिसके सुखद परिणाम प्राप्त हो।

राजस्थान सरकार के अतिरिक्त मुख्य सचिव अभय कुमार ने मुख्य अतिथि के रूप में प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन करते हुए उन्हें संवाद और समन्वय की शक्ति अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा अगर आप अच्छे नेगोशिएटर बनना चाहते है तो पहले आपको अच्छा श्रोता बनाना होगा साथ ही तथ्य परक भी होना पड़ेगा। नेगोशिएटर भविष्य की अवश्यकता है जिससे कार्य आसान होंगे और मानव क्षमता का सही उपयोग होगा। इसके बाद समारोह का सबसे रोमांचक क्षण परिणाम की घोषणा रहा, जब कठिन मुकाबलों के बाद विजेता टीमों के नामों की घोषणा हुई।

 “नालसार यूनिवर्सिटी हैदराबाद” को प्रथम स्थान मिला, जबकि थे “द वेस्ट बंगाल नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ़ जुडिसियल साइंसेस”कोलकाता उपविजेता रही। बेस्ट नेगोशिएटर पुरस्कार देव प्रताप सिंह पेट्रोलियम यूनिवर्सिटी देहरादून को प्रताप हुआ, “स्पिरिट ऑफ़ दी कम्पटीशन” का ख़िताब एसवीकेएमएस इंदौर को प्राप्त हुआ।विजेता टीमों और प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया तथा सभी 60 टीमों के परिश्रम, अनुशासन और प्रस्तुति कौशल की सराहना की गई। परिणाम के बाद प्रदर्शित ‘जर्नी ऑफ वीजीयू’ में विश्वविद्यालय की स्थापना से अब तक की शैक्षणिक, अनुसंधान और आधारभूत उपलब्धियों को दर्शाया गया, जिसे अतिथियों और विद्यार्थियों ने खूब सराहा। कार्यक्रम के अंत में विधि विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ शिल्पा राव ने धन्यवाद ज्ञापित किया ।

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