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कोक स्टूडियो भारत ने सीजन-4 की पांचवी रिलीज ‘हिवड़े रो हार’ पेश की

कोक स्टूडियो भारत ने अपने सीजन 4 की पांचवीं रिलीज के साथ वापसी की है। ‘चौधरी’ को आवाज देने वाले लोकप्रिय गायक मामे खान, निर्माता वैभव पाणी और गायक मोहम्मद फैज ‘हिवड़े रो हार’ के लिए साथ आए हैं। ‘हिवड़े रो हार’ के माध्यम से मारवाड़ी लोकगीत को समकालीन तरीके से प्रस्तुत किया गया है। राजस्थान की समृद्ध लोकगीत परंपरा पर आधारित इस गाने में प्यार एवं रिश्तों को लेकर एक प्रेमिका की भावना के माध्यम से खूबसूरत पलों को दर्शाया गया है। यहां व्यक्तिगत भावनाओं को सामाजिक धारणाओं के साथ मिलाया गया है।

इसके बोल अपने प्रेमी के साथ अपनी जिंदगी बिताने की चाहत रखने वाली प्रेमिका को केंद्र में रखते हुए तैयार किए गए हैं। इस प्रेम में एक-दूसरे पर संदेह की कोई गुंजाइश नहीं है। वह पूरी रात प्रेमी का इंतजार करती है और ऐसे में ‘हिवड़े रो हार’ यानी दिल के हार के टूटने के बोल से उसका दर्द झलकता है। इन भावनाओं को खरताल, रावनहट्टा और मोरचांग की आवाजों के साथ निखारा गया है। साथ ही स्विंग और बास ऑफ यूके गैराज से इस लोकगीत की मूलभावना को छेड़े बिना ही नई लय दी गई है। अंतरे के बाद खरताल और रावनहट्टा के बीच की जुगलबंदी का पल बहुत लुभावना है। ऐसा लगता है, जैसे दोनों वाद्य आपस में बातें कर रहे हैं।

कोका-कोला इंडिया एवं साउथवेस्ट एशिया के आईएमएक्स (इंटीग्रेटेड मार्केटिंग एक्सपीरियंस) लीड शांतनु गंगने ने कहा, ‘कोक स्टूडियो भारत में हमारा मानना है कि भारत की सबसे शक्तिशाली कहानियां इसकी स्थानीयता से निकलती हैं, जिन्हें संस्कृति, यादों और जीवंत अनुभवों से आकार मिलता है। राजस्थान की लोकगीत की परंपरा में एक दुर्लभ सी भावनात्मक ईमानदारी है और ‘हिवड़े रो हार’ के माध्यम से हम संगीत की नई धुनों के साथ उसी सरलता को बनाए रखना चाहते थे। मोहम्मद फैज, मामे खान और वैभव पाणी ने इसे भावनाओं की पूरी गहराई के साथ प्रस्तुत किया है। इसमें समकालीन धुनों के साथ भावनाएं और पारंपरिक अनुभव खिलकर सामने आते हैं। यह गीत पीढ़ियों के बीच प्रासंगिकता बनाते हुए भारत की सांस्कृतिक विविधता के लिए हमेशा सजग रहने की कोक स्टूडियो भारत की प्रतिबद्धता को दिखाने वाला है।’

मामे खान कहते हैं, ‘‘चौधरी’ गाने के बाद एक बार फिर कोक स्टूडियो भारत के साथ जुड़ना अच्छा अनुभव है। उस गाने को वर्षों से सभी लोग पसंद कर रहे हैं। आज भी ऐसे लोग मिलते हैं, जिनके मन में उस गाने की यादें बसी हैं और जो बताते हैं कि वह गाना उनके लिए कितना महत्व रखता है। यह बात किसी भी कलाकार के लिए बहुत खास है। ‘हिवड़े रो हार’ के साथ वापसी इसलिए भी बहुत सार्थक है, क्योंकि यह भी राजस्थानी संगीत पर आधारित है, लेकिन इसकी भावनाएं बिलकुल अलग हैं। मैं हम जैसे कलाकारों को अपना संगीत बड़े पैमाने पर लोगों तक पहुंचाने का मौका देने और संगीत की जड़ों से जुड़े रहने का अवसर देने के लिए कोक स्टूडियो भारत का आभारी हूं।’

मोहम्मद फैज कहते हैं, ‘‘हिवड़े रो हार’ मेरे दिल के बहुत करीब है, क्योंकि यह राजस्थान से जुड़ा है और इसकी भावनाएं मेरे लिए जानी पहचानी हैं। इसमें प्यार के बारे में बहुत सरलता और ईमानदारी से बात की गई है। मैं हमारी संगीत संस्कृति के इस रूप को देशभर के स्रोताओं तक पहुंचाने के लिए कोक स्टूडियो भारत का आभारी हूं।’

वैभव पाणी कहते हैं, ‘‘हिवड़े रो हार’ राजस्थान की भावनाओं की गर्मी, भावों के रंगों और स्वरूप को दिखाने का मेरा तरीका है। मैं इस संस्कृति में भले पला-बढ़ा नहीं हूं, लेकिन हमेशा इसने मुझे प्रेरित किया है। खरताल, रावनहट्टा और मोरचांग में ढेरों विविधताएं हैं और मैं यूके गैराज, हाउस, फ्यूचर बास, रॉक, हिप हॉप और भारतीय सांस्कृतिक संगीत को लाने के साथ-साथ चाहता था कि इस ट्रैक में खरताल, रावनहट्टा और मोरचांग को प्राथमिकता मिले। मैं चाहता था कि गाना रोचक और चुलबुला लगे और सुनने वालों को अपने साथ प्यार के खूबसूरत सफर पर ले जाए।’

‘हिवड़े रो हार’ के साथ कोक स्टूडियो भारत ने स्थानीय संगीत को नई ऊंचाई देने वाले अपने सीजन को और निखारा है। यह सीजन दिखाता है कि अगर सांस्कृतिक पहचान को केंद्र में रखा जाए, तो स्थानीय संगीत भी नई पहचान बना सकता है। ‘ऐ अजनबी’ को यूट्यूब पर 2.6 करोड़ व्यूज, ‘बुलेया वे’ को 1.8 करोड़ व्यूज, कचौड़ी गली को 1.5 करोड़ व्यूज और हूर को 17 लाख से ज्यादा व्यूज मिले हैं। ये सिर्फ आंकड़े नहीं हैं, बल्कि दिखाते हैं कि अपनी भाषा, संस्कृति और धुन के साथ लोग किस तरह जुड़ते हैं। कोक स्टूडियो भारत लगातार इस क्षेत्र में काम कर रहा है, जहां भारत की बहुत सी संगीत परंपराओं को नई आवाज, नए स्रोताओं के साथ अलग पहचान मिल रही है।

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