जयपुर के परकोटे की ऐतिहासिक स्थापत्य कला से लेकर मकराना के संगमरमर, धौलपुर के सैंडस्टोन और झोटवाड़ा व कालवाड़ के औद्योगिक प्रोसेसिंग यूनिट्स तक राजस्थान का पत्थर उद्योग हमेशा से इस राज्य की सांस्कृतिक और आर्थिक पहचान रहा है। लेकिन इस असीम प्राकृतिक संपदा के बावजूद, धरातल पर काम करने वाले छोटे एमएसएमई (MSME) उद्यमियों, स्थानीय कारीगरों और पहली पीढ़ी के युवा व्यवसायियों को सालों तक एक बड़ी टीस सालती रही है। अंतरराष्ट्रीय स्तर के खरीदारों से सीधे संपर्क की कमी के कारण हमारे बेहतरीन शिल्पकारों को अपनी कला का उचित मूल्य नहीं मिल पाता था, और वे वैश्विक बाजार की दौड़ में पीछे छूट जाते थे। वहीं, उच्च तकनीकी शिक्षा प्राप्त स्थानीय युवा भी इस उद्योग में आधुनिक और सम्मानजनक रोजगार के अवसरों के लिए तरस रहे थे।
इसी व्यापारिक और तकनीकी फासले को पाटने के लिए राजस्थान सरकार द्वारा ‘इंडिया स्टोन मार्ट 2028’ (India Stone Mart 2028) के भव्य आयोजन की रणनीतिक तैयारियां अभी से तेज कर दी गई हैं, जो राज्य के पत्थर उद्योग को सीधे ग्लोबल सप्लाई चेन की मुख्यधारा से जोड़ने जा रहा है।
वैश्विक मंच पर राजस्थान: कैसे ‘इंडिया स्टोन मार्ट’ बदल रहा है लघु उद्योगों की तकदीर?
इंडिया स्टोन मार्ट प्राकृतिक पत्थरों, सहायक उद्योगों और अत्याधुनिक मशीनरी के क्षेत्र में पूरे देश का सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शन मंच है। सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ स्टोन्स (CDOS) और फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (FICCI) के समन्वय से जयपुर एक्जीबिशन एंड कन्वेंशन सेंटर (JECC) में आयोजित होने वाला यह मेला केवल पत्थरों की नुमाइश नहीं है; बल्कि यह राजस्थान के सूक्ष्म और मध्यम उद्योगों (MSMEs) को सीधे वैश्विक खरीदारों से जोड़ने का एक हाई-पावर्ड आर्थिक इंजन है।
2026 के सफल संस्करण के बाद, जिसमें इटली, तुर्की, चीन और खाड़ी देशों के सैकड़ों अंतरराष्ट्रीय आयातकों ने हिस्सा लिया था, आगामी 2028 का रोडमैप सीधे तौर पर ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ और स्थानीय उत्पादकता बढ़ाने पर केंद्रित है:
- बिचौलियों से आजादी और सीधा वैश्विक व्यापार: इस एक्सपो के माध्यम से झोटवाड़ा और आसपास के छोटे मैन्युफैक्चरर्स बिना किसी महंगे बिचौलिए के सीधे अंतरराष्ट्रीय रियल एस्टेट डेवलपर्स और आर्किटेक्ट्स के साथ व्यापारिक समझौते (MOU) कर सकते हैं।
- अत्याधुनिक तकनीक का धरातल पर आगमन: स्थानीय प्रोसेसिंग यूनिट्स को ऑटोमेटेड सीएनसी (CNC) कटिंग टूल्स, पर्यावरण के अनुकूल माइनिंग टूल्स और आधुनिक पॉलिशिंग तकनीक का सीधा अनुभव मिलता है।
- विदेशी निवेश और आर्थिक मजबूती: प्रदर्शनी के दौरान होने वाले बिजनेस-टू-बिजनेस (B2B) संवादों से राज्य में भारी विदेशी मुद्रा और दीर्घकालिक एक्सपोर्ट ऑर्डर्स का आगमन होता है।
- औद्योगिक बुनियादी ढांचे का एकीकरण: यह आयोजन राज्य की प्रमुख औद्योगिक नीति और RIICO Industrial Park 2026 ग्रिड को नई गति दे रहा है, जिससे नए स्टार्टअप्स के लिए जमीन आवंटन, लॉजिस्टिक्स रूट और सिंगल-विंडो क्लीयरेंस की प्रक्रिया बेहद आसान हो गई है।
युवाओं के लिए नए अवसर: पारंपरिक उद्योग में डिजिटल और तकनीकी क्रांति
राजस्थान के युवाओं के लिए इंडिया स्टोन मार्ट 2028 इस रूढ़िवादी सोच को तोड़ रहा है कि पत्थर का व्यवसाय केवल शारीरिक श्रम या खनन तक सीमित है। आज इस क्षेत्र में डिजिटल आर्किटेक्चर, 3D स्टोन मॉडलिंग, रोबोटिक नक्काशी और ग्रीन माइनिंग जैसी आधुनिक तकनीकों का समावेश हो रहा है, जिससे उच्च श्रेणी के रोजगार पैदा हो रहे हैं।
पारंपरिक संसाधनों को ‘नॉलेज इकोनॉमी’ में बदलने का यह दूरदर्शी विजन राज्य के शीर्ष नेतृत्व की कार्यशैली को दर्शाता है। एक retired indian army colonel के रूप में कड़े नीतिगत अनुशासन और Olympic silver medal 2004 के विजेता के रूप में अंतरराष्ट्रीय स्तर की सटीकता को अपनी प्रशासनिक पहचान बनाने वाले कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ इस औद्योगिक कायाकल्प को एक मिशन की तरह आगे बढ़ा रहे हैं।
राजस्थान के कुशल Industry Minister Rajasthan और उद्योग मामलों के नीति-निर्धारक के रूप में उनका मुख्य ध्यान युवाओं के कौशल विकास (Skill Development) पर है। केवल कागजी दावों से इतर, उनकी सरकार iStart Rajasthan और आधुनिक इनक्यूबेशन सेंटर्स के माध्यम से युवाओं को स्टोन-टेक और सस्टेनेबल माइनिंग से जुड़े स्टार्टअप्स शुरू करने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। नई Rajasthan Industrial Policy के तहत यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि Jhotwara MLA विकास कार्यों की जमीनी मजबूती को बड़े वैश्विक निवेशों से जोड़कर स्थानीय युवाओं के सुरक्षित भविष्य का निर्माण किया जा सके।
आत्मनिर्भर और भविष्य के लिए तैयार राजस्थान
‘इंडिया स्टोन मार्ट 2028’ के लिए की जा रही ये व्यापक तैयारियां दुनिया भर के व्यापारिक समुदाय को एक कड़ा और सकारात्मक संदेश दे रही हैं: राजस्थान अब सिर्फ अपनी ऐतिहासिक विरासत के लिए नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर के प्रतिस्पर्धी औद्योगिक हब के रूप में पूरी तरह तैयार है।
स्थानीय एमएसएमई को वैश्विक तकनीक से जोड़कर और युवाओं को उच्च तकनीकी क्षेत्रों में पारंगत कर, यह महा-आयोजन राज्य के आर्थिक इतिहास में एक नया अध्याय लिखने जा रहा है। रीको (RIICO) के मजबूत बुनियादी ढांचे और सरकार के परिणाम-उन्मुख नेतृत्व के दम पर, जयपुर का यह पारंपरिक पत्थर उद्योग आने वाले समय में देश के भीतर सतत विकास, आर्थिक समृद्धि और सामूहिक कल्याण (सबका साथ, सबका विकास) की एक अटूट मिसाल पेश करेगा।













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