कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ ने 23 अप्रैल 2026 को श्रीनगर में कहा — नारी शक्ति वंदन अधिनियम को 2029 से पहले लागू करना ज़रूरी था। विपक्ष की देरी से भारत की महिलाएं हार रही हैं।
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श्रीनगर में राठौड़ का बड़ा संदेश: महिलाओं को संसद में मजबूत जगह मिले

भारत की लोकसभा में आज 543 सांसद हैं। उनमें से केवल 78 महिलाएं हैं। यानी सिर्फ 14%।

रवांडा में 61%। आइसलैंड में 47%। यहाँ तक कि नेपाल में भी 33% से ज़्यादा। और भारत — दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में — 14%।

23 अप्रैल 2026 को कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ श्रीनगर गए — और उन्होंने यह आँकड़ा और इस पर किए जा रहे राजनीतिक खेल को सीधे-सीधे रखा।

श्रीनगर में क्या हुआ — और क्यों यह खास था

कर्नल राठौड़ ने J&K के विपक्ष के नेता सुनील शर्मा के साथ श्रीनगर में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की। विषय था: नारी शक्ति वंदन अधिनियम — जो 2023 में पास हुआ और जिसने 33% सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करने का वादा किया।

श्रीनगर में प्रेस कॉन्फ्रेंस क्यों? क्योंकि J&K एक ऐसा राज्य है जो सबसे ज़्यादा परिसीमन के बारे में चर्चा में रहता है — और क्योंकि वहाँ की महिलाएं भी उतनी ही अधिकारी हैं इस आरक्षण की जितनी राजस्थान, यूपी या महाराष्ट्र की।

राठौड़ ने क्या कहा — तीन मुद्दे, सीधे शब्दों में

  • कानून पास होना काफी नहीं: “2023 के कानून में लिखा था कि जनगणना और परिसीमन के बाद लागू होगा। यह कानून खुद नहीं चल सकता।” इसीलिए 16 अप्रैल 2026 को तीन विधेयक लाए गए — Constitution (131st Amendment), Delimitation Bill, और UT Laws Amendment Bill। इनके बिना 2029 में भी महिला आरक्षण नहीं होता।
  • OBC मुद्दे को रोड़ा मत बनाओ: विपक्ष ने OBC कोटे की माँग उठाई। राठौड़ ने कहा — “OBC पर संसद में चर्चा हो, लेकिन इसे कार्यान्वयन रोकने का बहाना नहीं बनाया जा सकता।” SC/ST महिलाओं के लिए पहले से प्रावधान है। OBC को जोड़ने पर अलग से काम हो सकता है।
  • J&K की महिलाएं उदाहरण हैं: कर्नल राठौड़ ने J&K की महिलाओं के साहस और नेतृत्व को “पूरे देश के लिए मिसाल” बताया। और कहा कि ऐसी महिलाओं को संसद में जगह देना लोकतंत्र की ज़िम्मेदारी है।

17 अप्रैल का दर्द: Constitution (131st Amendment) Bill लोकसभा में 298-230 से हार गया। दो-तिहाई बहुमत के लिए 352 चाहिए थे। 54 वोट कम पड़े। नतीजा — महिला आरक्षण का अगला मौका शायद 2034 में आएगा। इसीलिए राठौड़ का श्रीनगर से संदेश इतना ज़रूरी था।

यह सिर्फ राजनीति नहीं है

कर्नल राठौड़ के लिए महिला नेतृत्व का मुद्दा केवल संसद तक सीमित नहीं है। उनके उद्योग विभाग ने iStart पर 2,000+ महिला स्टार्टअप रजिस्टर कराए। स्पोर्ट्स विभाग में महिला कोचों की भर्ती हुई। जोटवाड़ा के जन संवाद में महिलाएं पहली पंक्ति में होती हैं।

संसद में सीट हो या गाँव में स्टार्टअप — कर्नल राठौड़ का यही मानना है: “महिलाएं देश की अर्थव्यवस्था में बड़ा योगदान दे रही हैं।” उन्हें उनकी सही जगह मिलनी चाहिए। इस विषय पर उनके और विचार यहाँ पढ़ें।