केयरएज रिसर्च के नए अध्ययन के मुताबिक भारतीय कॉरपोरेट्स द्वारा पर्यावरण, सामाजिक और शासन (ईएसजी) रिपोर्टिंग में 160 प्रतिशत का सुधार हुआ है। यह शोध पिछले तीन वित्तीय वर्षों में शीर्ष 1,000 सूचीबद्ध संस्थाओं की रिपोर्ट का विश्लेषण है। कंपनियों द्वारा ईएसजी खुलासे में भारी सुधार देखा गया है और यह एकीकृत रिपोर्ट्स, स्थायित्वपूर्णता (या सस्टेनिबिलिटी) रिपोर्ट और व्यावसायिक उत्तरदायित्व और स्थायित्वपूर्णता रिपोर्ट (बीआरएसआर) पर आधारित है। इसकी वजह से इन कंपनियों के ईएसजी स्कोर में सुधार देखने को मिला।
यह सुधार सेबी की तरफ से ईएसजी खुलासे पर दिए जाने वाले जोर का नतीजा है, जिसकी वजह से वित्त वर्ष 2020 में ईएसजी डेटा का खुलासा करने वाली कंपनियों की संख्या 127 से बढ़कर 2022 में 330 हो गई। सेबी का सर्कुलर लक्षित कंपनियों को वित्त वर्ष 23 के बाद से स्थायित्वपूर्णता आंकड़ों को सार्वजनिक करना अनिवार्य बना दिया है। वास्तव में वित्त वर्ष 22 में 18 प्रतिशत लक्षित कंपनियों ने स्वेच्छा से बीआरएसआर आंकड़ों को सार्वजनिक किया।
एनर्जी और यूटिलिटीज सेक्टर में लगभग 50% कंपनियों ने ईएसजी मानकों पर रिपोर्टिंग की। सेवा क्षेत्र की संस्थाएं पारंपरिक रूप से ईएसजी डेटा को सार्वजनिक करने के मामले में मजबूत रही हैं। साथ ही वित्तीय संस्थानों के बीच अपने परिचालन में ईएसजी प्रणालियों को अपनाए जाने के प्रति बढ़ती जागरूकता की वजह से पिछले तीन वित्तीय वर्षों में 41% कंपनियों ने ईएसजी डेटा को सार्वजनिक किया है।
यहां तक कि शीर्ष 1,000 सूचीबद्ध कंपनियों के लिए कुल स्कोर अभी भी “औसत” ग्रेड श्रेणी में है, ईएसजी डेटा का खुलासा करने वाली कंपनियों ने पिछले तीन वित्तीय वर्षों में अपने स्कोर में लगभग 15 प्रतिशत का सुधार दर्ज किया है।
मैटीरियल्स क्षेत्र की कंपनियों ने पिछले तीन वित्तीय वर्षों में औसत ईएसजी प्रदर्शन में 20 प्रतिशत सुधार के साथ उल्लेखनीय सुधार दिखाया है। यह इस बात पर प्रकाश डालता है कि स्टील, सीमेंट और खनन जैसे भारी उत्सर्जक उद्योग धीरे-धीरे अपने दीर्घकालिक ईएसजी लक्ष्यों के साथ तालमेल बिठाने के लिए पर्यावरण हितैषी पहलों को अपना रहे हैं। यूटिलिटीज और एनर्जी सेक्टर में भी उल्लेखनीय सुधार देखा गया है, जो पर्यावरण के अनुकूल ऊर्जा संसाधनों की ओर एक स्पष्ट बदलाव के साथ-साथ दीर्घकालिक ईएसजी प्रतिबद्धताओं की ओर इस क्षेत्र के स्थानांतरण का संकेत देता है। यह 2070 तक विशुद्ध शून्य उत्सर्जन प्राप्त करने के लिए भारत की अपनी प्रतिबद्धता पर सरकार की तरफ से जोर दिए जाने के लक्ष्य के बिल्कुल अनुरूप है।
केयरएज के प्रबंध निदेशक और सीईओ मेहुल पांड्या ने कहा, “जैसा कि केयरएज के नवीनतम अध्ययन से पता चलता है, भारतीय कॉरपोरेट्स द्वारा वित्त वर्ष 20 से वित्त वर्ष 22 तकईएसजी रिपोर्टिंग में 160 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, और यह काफी उत्साहजनक है। यह न केवल नवीनतम केंद्रीय बजट में पर्यावरण के अनुकूल विकास पर भारत सरकार के फोकस पर जोर दिए जाने के लक्ष्य के मुताबिक है, बल्कि यह 2070 तक नेट जीरो हासिल करने की दिशा में देश की प्रतिबद्धता में भी मददगार है। बाजार नियामक सेबी के व्यावसायिक उत्तरदायित्व और स्थायित्वपूर्णता रिपोर्ट पर सर्कुलर के साथ शीर्ष 1,000 सूचीबद्ध संस्थाओं के लिए वित्त वर्ष 23 से ईएसजी डिस्क्लोजर अनिवार्य कर दिया गया है। मेरा मानना है कि स्थायी प्रणालियों की ओर हस्तांतरण के लिए भारतीय कॉरपोरेट्स को और बढ़ावा मिलेगा।“













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