रियल एस्टेट क्षेत्र के दिग्गज और 20 साल से अधिक समय तक संस्थागत प्लेटफार्म निर्मित करने के अनुभवी अंशुल सिंघल ने वैंट्रॉक रियल असेट्स प्राइवेट लिमिटेड की घोषणा की है, जो कि ऑपरेटर के नेतृत्व वाला वेयरहाउसिंग, औद्योगिक और लॉजिस्टिक पार्कों पर केंद्रित रियल असेट्स प्लेटफॉर्म होगा। मुंबई स्थित मुख्यालय वाला यह प्लेटफॉर्म 11.5 मिलियन वर्गफीट के विकास की योजना के साथ अपनी यात्रा शुरू कर रहा है, जिसकी ग्रॉस डेवलपमेंट वैल्यू 4200 करोड़ रुपए (~434 मिलियन यूएस डॉलर) है।
4200 करोड़ रुपए की विकास योजना में से, शुरुआती 1100 करोड़ रुपए (~113 मिलियन यूएस डॉलर) के मूल्य का लगभग 3 मिलियन वर्गफीट विकास नेशनल कैपिटल रीजन (एनसीआर), बेंगलुरु और पुणे में होगा। यहां 2027 में निर्माण शुरू होगा और निवेशकों के लिए पहली किराए की आय 2028 से मिलने की शुरुआत होने का अनुमान है। इन प्रोजेक्ट्स के लिए जमीन को लेकर काफी आगे तक बातचीत हो रही है, साथ ही कागजी कार्रवाई भी पूरी हो चुकी है और नियामक स्वीकृतियां भी लगभग मिल चुकी हैं। इसके अलावा शेष ~8.5 मिलियन वर्गफीट का प्रस्तावित विकास भी इन्हीं क्षेत्रों के आसपास और मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन में, विभिन्न चरणों में अगले 12 से 18 महीनों में किया जाएगा।
शहरी क्षेत्र के अन्दर मौजूद खाली, अविकसित या पुराने विकसित भूखंडों पर कंपनी विकास की रणनीतिक योजना बना रही है, जो ग्रेड-ए वेयरहाउसिंग और औद्योगिक पार्क के लिए उपयुक्त हैं। शहरी या विकसित क्षेत्रों के बीच मौजूद इन रणनीतिक इनफिल लोकेशन पर ~15 से 60 एकड़ के भूखंड मौजूद हैं, जिनमें 0.4 से लेकर 1.5 मिलियन वर्गफीट का संभावित विकास किया जा सकता है। वैंट्रॉक की पहली रणनीति पोर्ट से लेकर दरवाज़े तक की सम्पूर्ण श्रृंखला को समायोजित करती है – जिसमें – बिग बॉक्स और बिल्ड टू सूट, बहु-मंजिला, लास्ट माइल, डार्क स्टोर, सेल्फ-स्टोरेज, कोल्डचेन, कार्यबल के लिए रिहायशी सुविधा, इंडस्ट्रियल प्लॉट्स और मिक्स्ड यूज़ सभी प्रकार के समाधान शामिल हैं, और स्थानीय जरूरत के अनुरूप वेयरहाउस के साथ-साथ ऑफिस और रिटेल का भी प्रावधान रखा गया है। कंपनी आगे जाकर अन्य चरणबद्ध रूप से अन्य रियल एस्टेट श्रेणियों में विस्तार करने की योजना बना रही है जिसमें ग्लोबल कापबिलिटी सेंटर (जीसीसी), अर्ध शहरी ऑफिस परिसर, स्ट्रेटा ऑफिस, डाटा सेंटर और इंफ्रास्ट्रक्चर एसेट जिसके हर एक ही अपनी रणनीति होगी और और विस्तार योजना का चरणबद्ध हिस्सा होंगे।
“आज देश का प्रत्येक औद्योगिक और वेयरहाउसिंग पार्क भरा हुआ है और जो नए बन रहे हैं, वे ग्राहकों के व्यापार से एक घंटे से ज्यादा की दूरी पर है। हम दूसरी दिशा में जा रहे हैं- हम ऐसे स्थान चुन रहे हैं, जो कि स्थापित कॉरिडोर के अंदर बचे हुए हैं, और ऐसे मौजूदा ग्रेड-बी शेड्स, जिन्हें ग्रेड-ए के मानकों तक हम लेकर आएंगे। इन इनफिल भूखंडों को ढूंढना और उन्हें एक साथ लेकर आना एक बेहद धीमी और कठिन प्रक्रिया है, लेकिन निवेश को एक बेहतर मूल्य प्रदान करती है। हमने अपने पहले 3 मिलियन वर्गफीट एकत्रित कर लिए हैं और 2027 में इसका निर्माण भी शुरू हो जाएगा।” वैंट्रॉक के संस्थापक और सीईओ अंशुल सिंघल ने बताया।
“भारत के अधिकांश वेयरहाउस तब बने थे, जब लोग यह सवाल ही नहीं पूछते थे कि यहां काम करना सुरक्षित है या नहीं। परिणामस्वरूप, अग्निशमन, संरचना, प्रकाश व्यवस्था, वायु संचार आदि जैसे मुद्दों को प्राथमिकता नहीं दी गई। ऐसे भवनों को उच्च मापदंडों तक लाना जितनी बड़ी चुनौती रियल एस्टेट के लिए है, उतनी ही बड़ी चुनौती संचालन और प्रशासन के दृष्टिकोण से भी है, और मुझे इस हिस्से की सबसे अधिक चिंता है। वैंट्रॉक ऐसे लोगों द्वारा चलाया जाता है जिन्होंने पहले भी वैश्विक मानकों पर ये संसाधन निर्मित किए हैं, और जानते हैं कि साइट पर नियमों का पालन करना क्या होता है, न सिर्फ किसी कागज़ या स्लाइड पर। चेयरमैन के रूप में मेरा लक्ष्य है कि जैसे-जैसे विकास का विस्तार होता जाए, वैसे-वैसे मानक भी बरकरार रहें, बोर्डरूम में भी और जमीन पर भी, जिससे कि हमारे द्वारा बनाए गए संसाधन हमारे बाद भी मजबूत टिके रहें,” वैंट्रॉक बोर्ड के चेयरमैन शैलेश वी हरिभक्ति ने कहा।
प्रत्येक वैंट्रॉक प्रोजेक्ट को निर्माण शुरू होने के बाद जमीन से राजस्व तक 18 से 24 महीने में पहुंचाने के लिए बनाया गया है। इन परियोजनाओं के लिए इक्विटी पूंजी, निर्माण कार्य के लिए ऋण और जहां उपयुक्त हो, संस्थागत खरीदारों से अग्रिम वित्तपोषण के जरिए धन जुटाने की योजना है। इसके साथ ही कंपनी जमीन मालिकों और पूंजीगत साझेदारों के साथ संयुक्त उद्यम, संयुक्त विकास और/या लंबी अवधि की ऐसी लीज व्यवस्थाएं कर रही है, जिनमें लीज के अधिकार उसकी अवधि पूरी होने तक रखे जाएंगे।
अपने नवाचारी पहले कदम के रूप में वैंट्रॉक का प्रस्ताव है कि प्राइम लोकेशन पर मौजूद पुराने वेयरहाउस को खरीदकर उनका कायाकल्प किया जाए, जहां कंपनी मौजूदा ग्रेड-बी बिल्डिंग को खुद या ज्वाइंट वेंचर के माध्यम से खरीदेगी। कंपनी की इन-हाउस डेवलपमेंट टीम फिर इन्हें 6 से 12 महीनों के अंदर ग्रेड-ए मानकों पर अपग्रेड करेगी, यानी नए वेयरहाउस को बनाने की समयावधि से आधे समय और उससे कई गुना कम लागत में। यह मॉडल सभी हितग्राहियों के लिए फायदेमंद भी है, क्योंकि उद्योगों और व्यवसाइयों को उनकी जरुरत के पास ही औद्योगिक स्तर के ग्रेड-ए संसाधन मिलेंगे और शहरों को भी उच्च स्तर के वेयरहाउसिंग, लॉजिस्टिक और औद्योगिक संसाधन जमीन में निवेश किए बिना उपलब्ध हो सकेंगे।
वैंट्रॉक ने जिन बाजारों और कॉरिडोर में प्रवेश किया है, वह गहन बाज़ार अध्ययन और सीबीआरई के निवेश थीसिस पर आधारित है, जो भारत के बड़े शहरों के आसपास उच्च मूल्य के वेयरहाउसिंग कॉरिडोर की पहचान करने का काम करता है। सीबीआरई रिसर्च के अनुसार, 2026 से 2031 के बीच भारत में अनुमानित 117 मिलियन वर्गफीट के ग्रेड-ए वेयरहाउसिंग सप्लाई की मांग है, और वैंट्रॉक की रणनीति है कि इन बेहद कम उपलब्धता वाले कॉरिडोर में सबसे पहले आकर बाजार में अपना मजबूत स्थान बनाया जाए।
“भारत का ग्रेड-ए वेयरहाउसिंग मार्केट अभी बहुत बड़े मोड़ पर है। 3पीएल ऑपरेटर, ई-कॉमर्स व्यवसाई और निर्माण करने वाली औद्योगिक इकाइयां सभी प्रमुख शहरों के आसपास गुणवत्ता पूर्व सेवाएं प्रदान करने के लिए जगह ढूंढ रही हैं। और इस दशक के अंत तक इसकी मांग और बढ़ने का अनुमान है। सीबीआरई के शोध और अनुशंसाओं में ऐसे कॉरिडोर और ऐसे अवसरों की भी तलाश की गई है। इन जरूरतों के लिए ही बनाए गए इस प्लेटफॉर्म को बढ़ता देखकर हम आशांवित हैं,” सीबीआरई इंडिया के कंसल्टिंग और वैल्यूएशन के मैनेजिंग डायरेक्टर रमी कौशल ने कहा।













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