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पाकिस्तान बॉर्डर से ओलंपिक पोडियम तक: राज्यवर्धन सिंह राठौड़ की वीरता और विरासत

भारतीय सेना की वर्दी से लेकर ओलंपिक पोडियम तक का सफर आसान नहीं होता। कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ का करियर सैन्य सेवा, जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद विरोधी अभियानों और Kargil War में सेवा से लेकर अंतरराष्ट्रीय शूटिंग में भारत के लिए पदक जीतने तक फैला है। आधिकारिक जीवनी के अनुसार उन्होंने भारतीय सेना में 26 वर्षों तक सेवा की और जम्मू-कश्मीर में counter-terrorism operations में हिस्सा लिया।

सेना में सेवा और Kargil War

राज्यवर्धन राठौड़ National Defence Academy और Indian Military Academy से प्रशिक्षण लेने के बाद 15 दिसंबर 1990 को 9th Grenadiers (Mewar) Regiment में commissioned हुए। आगे चलकर उन्होंने सेना में अलग-अलग जिम्मेदारियां संभालीं और Kargil War के दौरान भी सेवा की।

उनकी सैन्य सेवा में जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद विरोधी अभियान भी शामिल रहे। आधिकारिक जानकारी के अनुसार उनकी रेजिमेंट को Chief of Army Staff’s Commendation और Jammu & Kashmir Governor’s Commendation से भी सम्मानित किया गया।

सेना के साथ शूटिंग का सफर

सैन्य सेवा के दौरान ही राठौड़ ने शूटिंग में अपनी पहचान बनानी शुरू की। Double Trap Shooting में उनके प्रदर्शन ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं तक पहुंचाया।

2002 Commonwealth Games में उन्होंने Double Trap में गोल्ड मेडल जीता। इसके बाद 2003 World Championship और अन्य अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भी उन्होंने भारत का प्रतिनिधित्व किया। आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार 2004 में वह Double Trap की विश्व रैंकिंग में पहले स्थान पर भी रहे।

Athens 2004: Olympic Podium पर भारत

राज्यवर्धन राठौड़ के खेल करियर का सबसे बड़ा पड़ाव 2004 Athens Olympics रहा। Men’s Double Trap में उन्होंने रजत पदक जीता। Olympedia के रिकॉर्ड में भी उन्हें इस स्पर्धा में दूसरे स्थान पर दर्ज किया गया है।

यह भारत का पहला व्यक्तिगत Olympic silver medal था। इस उपलब्धि ने राठौड़ को भारतीय शूटिंग और Olympic history में एक महत्वपूर्ण स्थान दिया।

खेलों से जुड़ी विरासत

ओलंपिक सफलता के बाद भी राठौड़ का खेलों से जुड़ाव बना रहा। उन्होंने Youth Affairs & Sports से जुड़े कार्यों में भी भूमिका निभाई। राजस्थान में खेल, युवा और प्रशिक्षण से संबंधित वर्तमान गतिविधियों की जानकारी आधिकारिक वेबसाइट के Youth Affairs & Sports पेज पर देखी जा सकती है।

उनकी यात्रा की विस्तृत जानकारी के लिए Rajyavardhan Rathore की आधिकारिक प्रोफाइल भी देखी जा सकती है। वहीं खेल और सार्वजनिक गतिविधियों से जुड़े नए अपडेट News & Updates सेक्शन में उपलब्ध हैं।

सैन्य सेवा से Olympic Legacy तक

राज्यवर्धन सिंह राठौड़ की कहानी में सेना, शूटिंग और ओलंपिक तीन महत्वपूर्ण पड़ाव दिखाई देते हैं। Kargil War और जम्मू-कश्मीर में सैन्य सेवा के बाद Athens 2004 में Olympic silver medal तक पहुंचना उनके सार्वजनिक जीवन की प्रमुख उपलब्धियों में शामिल है।

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