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न्यूट्रिशनिस्ट साक्षी लालवानी ने रोजमर्रा की चिंताओं को स्पष्ट किया

खाना पकाने के लिए कौन सा तेल वाकई सेहतमंद है, इसे लेकर बढ़ रही उलझन के बीच, मौजूदा पॉडकास्ट सीरीज़ भारतीयों को सोच-समझकर, विज्ञान-आधारित चुनाव करने में मदद करना चाहती है। एक एपिसोड में न्यूट्रिशनिस्ट साक्षी लालवानी ने खाना पकाने के तेल को चुनने, लेबल पढ़ने और खाना बनाने की सुरक्षित प्रक्रियाओं को लेकर रोजमर्रा की चिंताओं को स्पष्ट किया है। ये एपिसोड घरेलू खाने की बातचीत को फैट, पोषण और भारतीय रसोई में पाम ऑयल की महत्वपूर्ण भूमिका पर सबूत-आधारित जानकारी से जोड़ते हैं।

पहले एपिसोड में, साक्षी ने पाम ऑयल की बुनियादी बातें समझाईं। उन्‍होंने बताया कि यह एक प्‍लांट-बेस्‍ड ऑयल है, जो ऑयल पाम के फल से निकाला जाता है। वे बताती हैं कि पाम ओलिन प्राकृतिक रूप से ट्रांस-फैट मुक्त होता है, उच्च तापमान पर स्थिर रहता है, और इसमें विटामिन ई टोकोट्राइनॉल्स होते हैं, जबकि रेड पाम ऑयल में बीटा-कैरोटीन है – जो प्रोविटामिन ए का स्रोत है। वे पाम ऑयल के संतुलित फैटी एसिड मिश्रण पर जोर देती हैं (लगभग 50% संतृप्त, 40% मोनोअनसैचुरेटेड और 10% पॉलीअनसैचुरेटेड फैट्स) और उनका कहना है कि सेहतमंद भोजन खाना पकाने की स्‍मार्ट आदतें हैं, न कि किसी एक तेल को पूरी तरह हटा देना।

अगले एपिसोड में, उन्‍होंने “नो पाम ऑयल” लेबलों की बढ़ती मौजूदगी पर चर्चा की और बताया कि ये टैग मुख्य रूप से मार्केटिंग से प्रभावित हैं, जो स्वस्थ होने का भ्रम पैदा करते हैं, वो भी वास्तविक पोषण मूल्य को दिखाए बगैर। वे श्रोताओं को सलाह देती हैं कि सामने के लेबल से आगे बढ़ें, सामग्री सूची जांचें, और समझें कि पाम ऑयल हटाने पर कौन से तेलों का इस्तेमाल हो रहा है।

इस सीरीज में जोर दिया गया है कि संतुलित आहार का हिस्सा बनने पर पाम ऑयल में टोकोट्राइनॉल्स और कैरोटेनॉइड्स (रेड पाम ऑयल में) जैसे फायदेमंद कंपाउंड्स होते हैं, जो शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट्स हैं। फूड साइंस बताती है कि पाम ऑयल उच्च तापमान पर स्थिर रहता है, ऑक्सीडेशन के प्रति रेजिस्‍टेंट है, स्वाद में न्यूट्रल है, इसकी शेल्फ लाइफ ज्‍यादा होती है, अन्य वनस्पति तेलों की तुलना में हानिकारक कंपाउंड्स बनने की संभावना कम है, और प्राकृतिक रूप से ट्रांस-फैट मुक्त है तथा इसमें पार्शियल हाइड्रोजनेशन प्रक्रिया की जरूरत नहीं पड़ती। यह भोजन में कम तेल सोखता है, जिससे क्रिस्प और एकसमान तले हुए व्यंजन मिलते हैं।

साक्षी आईसीएमआर–एनआईएन डाइटरी गाइडलाइंस (2024) को मजबूत करती हैं, जो प्रति व्यक्ति प्रतिदिन विजिबल फैट को 25–30 ग्राम तक सीमित रखने और संतुलित फैटी एसिड प्रोफाइल बनाए रखने के लिए विभिन्न प्‍लांट-बेस्‍ड ऑयल को रोटेट करने की सलाह देती हैं। इस दृष्टिकोण में, पाम ऑयल को रोजमर्रा के भारतीय खाना पकाने के लिए कई उपयुक्त विकल्पों में से एक माना गया है।