जैन धर्म के इतिहास में पहले कभी नहीं हुआ ऐसा एक ऐतिहासिक पर्युषण पर्व का आयोजन पालिताना में श्री शत्रुंजय गिरिराज की तलहटी में स्थित श्री सिद्धवड की पावन भूमि पर निर्मित ‘तक्षशिला नगरी’ में किया जा रहा है। “निज में निवास, सिद्धवड में चातुर्मास” के अंतर्गत 175 साधु-साध्वी भगवंतों की निश्रा में लगभग 1100 आराधक प्रतिदिन 21 घंटे का मौन धारण करेंगे। वे मोबाइल फोन का भी त्याग करेंगे। करीब दो महीनों तक — यानी भाद्रवा सुद 4 तक — आराधक मोबाइल फोन का पूरी तरह से त्याग करेंगे। इसके अलावा, वे प्रतिदिन 6 घंटे स्वाध्याय भी करेंगे।
आयंबिल के भीष्म तपस्वी आचार्य हेमवल्लभसूरीश्वरजी, पन्यास लब्धिवल्लभविजयजी महाराज और पन्यास यशरत्नविजयजी महाराज की निश्रा में “आत्मा को जानो, आत्मा को अनुभव करो” उत्सव मनाया जाएगा।
इस संपूर्ण उत्सव का लाभ मुंबई के हिरालक्ष्मीबेन खांतीलाल शाह परिवार ने लिया है। परिवार के मुखिया पंकजभाई शाह ने बताया कि प्राकृतिक वातावरण में और गुरु भगवंतों की सन्निधि में आराधक तपस्या के दौरान आत्मा की गहराई का अनुभव करेंगे।
आचार्य हेमवल्लभसूरीश्वरजी महाराज ने कहा कि “इस झूठी दुनिया में रोज़-रोज़ दुखी क्यों होना? सुख कहीं बाहर नहीं है, वह हमारे भीतर ही मिलेगा। जब समर्थ आत्मा इंद्रियों के आगे पूर्णत: असहाय होकर भिखारी की तरह विषयों की याचना करता है, तो यह विवशता करुणा से भरा ऐसा दृश्य है जो इस संसार में और कहीं देखने को नहीं मिलता।”
इस अवसर पर गुजरात के गृह मंत्री श्री हर्षभाई संघवी और जैन अग्रणी श्री दीपकभाई बारडोली ने भी उत्सव में सहभागिता की। हर्षभाई संघवी मोबाइल त्याग की भावना से अत्यधिक प्रभावित हुए और आराधकों की अनुशासनबद्धता की सराहना की। इसके अतिरिक्त, शासनरत्न श्री कुमारपाल विजयशाह ने मौन और मोबाइल के त्याग के संकल्प की प्रशंसा की और कहा कि “बिना कारण बोलना विकृति है, जबकि मौन प्रकृति है।” उन्होंने ऐसे आयोजनों की सराहना करते हुए लाभार्थी पंकजभाई के परिवार के प्रति आभार व्यक्त किया।
पंकजभाई शाह ने बताया कि 3 से 7 सितंबर और 17 से 21 सितंबर के दौरान पांच दिन की दो शिविरें तथा सिद्धवड आध्यात्मिक उपधान तप की अद्भुत आराधना होगी। इसके अलावा, पहला प्रवेश 2 अक्टूबर से और दूसरा प्रवेश 4 अक्टूबर से प्रारंभ होगा, जिसकी मोक्षमाला 21 नवंबर के शुभ दिन पर होगी।











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