जयपुर के निवासी 32 वर्षीय मनीष खंडेलवाल को वर्ष 2019 में उनके बड़े भाई के निधन के बाद कई दुखों का सामना करना पड़ा। उस समय मनीष एक परिवहन कंपनी में काम कर मात्र 18000 रु. प्रति माह कमाते थे, जब उनके ऊपर दो परिवारों को संभालने की ज़िम्मेदारी आ गई। तब उन्होंने ई- कॉमर्स की ओर रुख करने के बारे में सोचा, जिसके बारे में उन्होंने लोगों से सुना था कि कैसे कम पैसा लगाकर भी इस प्लेटफॉर्म पर अपना बिज़नेस शुरू करके पैसा कमाया जा सकता है। इसके बाद मनीष ने मीशो, जो कि एक ऑनलाइन मार्केट प्लेस है, पर ‘युथ फर्स्ट’ रजिस्टर करके पुरुषों के कपड़े जैसे शर्ट और टीशर्ट बेचना शुरू किया।
प्रारंभ में, ई-कॉमर्स की दुनिया में मनीष को काफ़ी संघर्ष करना पड़ा क्योंकि उनके पास ऑनलाइन बिक्री का कोई अनुभव नहीं था। हालांकि उनके भतीजे अंकित की मदद और मीशो के आसान प्लेटफॉर्म और विस्तृत पहुँच ने मनीष के व्यवसाय को धीरे-धीरे बढ़ा दिया। सबसे पहले उन्होंने चप्पल बेची, उसके बाद कपड़े और फिर अंत मे सारे परिधान बेचना शुरू किया। फिर तो उनके इस सफर में कदम कदम पर कामयाबी मिलती गई। अच्छी लिटी और सस्ते दाम होने के कारण उन्हें बहुत लोकप्रियता मिली। इस सफलता के बाद उन्होंने अपने उत्पादन को ढ़ाने के साथ – साथ ऐसे लोगों को काम पर रखना शुरू किया, जिनमें नैतिकता के साथ काम करने का उत्साह था।
आज ‘युथ फर्स्ट’ का संचालन ‘सेवंती’ नाम की कंपनी के रूप में होता है, जिसने युवा पीढ़ी को नौकरी के कई अवसर दिए हैं। आज इसमें 250 से भी ज़्यादा पार्ट टाइम और कई फुल टाइम कर्मचारी काम कर रहे हैं। जयपुर में इनके 3 गोदाम हैं, जहाँ उनकी मैनुफैक्चरिंग यूनिट, डिस्पैचिंग फैसिलिटी, और हेड ऑफिस है। यहाँ से रोज़ करीब 1300 आर्डर देश के विभिन्न हिस्सों में डिस्पैच किये जाते है, और त्योहारों के दौरान आर्डर 3 गुना बढ़ जाते है।
मीशो पर अपना व्यवसाय शुरू करने के अनुभव के बारे में विस्तार से बताते हुए मनीष ने कहा, जब मैंने और मेरे भतीजे अंकित ने पहली बार 2019 में मीशो पर ऑनलाइन समान बेचना शुरू किया था, तब हमें ई-कॉमर्स के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। लेकिन हमने सफलता के दृढ़ निश्चय के साथ कड़ी मेहनत की, अपनी गलतियों को सुधारा और बहुत कुछ सीखा। मीशो पर हमें एक ऐसा प्लेटफार्म मिला जो हमारे उत्पादों को देश के कोने-कोने में सभी तक पहुँचा सकता है। इसी कारण हमारा व्यापार तेज़ गति से बढ़ने लगा।
हमने अपने पहले साल में 50 लाख रुपयों का कारोबार किया था, जो कि पिछले 4 सालों में 100गुना बढ़ गया है। इस वृद्धि ने हमारी किस्मत तो बदली ही, बल्कि हमसे जुड़े लोगों में नई जान भी फूँक दी। इससे हमें अपने व्यापार को और ऊंचाई पर ले जाने का विश्वास भी मिला है, अब हम भविष्य में अपने कैटलॉग में और भी उत्पादों को जोड़ेंगे।“ आज ई-कॉमर्स की ताकत के जरिए मनीष जैसे कई भारतीय उद्यमियों ने अपने आस-पास के क्षेत्र में रोज़गार के कई अवसर पैदा किये हैं। इसने लोगों को लिंग, धर्म, जाति की परवाह किये बिना पैसा कमाने की आज़ादी दी है।
मीशो के आसान प्लेटफॉर्म और जीरो कमीशन पॉलिसी ने देश के सेवाओं से वंचित हिस्सों के अनेक विक्रेताओं को ऑनलाईन सैलिंग की दुनिया में प्रवेश करने और अपने क्षेत्र में नौकरियों का निर्माण करने के लिए प्रोत्साहित किया है।
मनीष की कहानी दृढ़ निश्चय और इच्छाशक्ति का उदाहरण प्रस्तुत करती है। उनकी सफलता का सफर उभरते हुए व्यवसायों के लिए एक प्रेरणा है, जो अपने जीवन में आगे बढ़ने का संघर्ष कर रहे हैं, तथा आत्मनिर्भर’ बनने के लिए ई-कॉमर्स का उपयोग करना चाहते हैं। मनीष की सफलता हमें अहसास कराती है कि यदि हम भारतीय ठान लें, तो हम किसी भी बाधा को पार करके अपने लक्ष्य प्राप्त कर सकते हैं।













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