महिलाओं में सबसे अधिक पाया जाने वाला कैंसर ब्रेस्ट (स्तन) में होता है। हालांकि यह पहले जितना घातक नहीं रहा और चिकित्सा विज्ञान में नई तकनीकों के कारण इसका इलाज काफी आसान हो गया है। नए ऑन्कोप्लास्टिक सर्जरी की तकनीकों की मदद से ब्रेस्ट कैंसर से जूझ रही महिलाएं इलाज कराने के बाद सामान्य जीवन व्यतीत कर सकती हैं।
पूरा इलाज कराना आवश्यक : रुकमणी बिरला हॉस्पिटल में सीनियर ब्रेस्ट एंड एंडोक्राइन सर्जन डॉ. अनुकृति सूद बताती हैं कि ब्रेस्ट कैंसर डायग्नोज होने पर उसका सर्जिकल थैरेपी, कीमोथैरेपी, रेडियोथैरेपी व एंडोक्राइन थैरेपी से इलाज होता है। कई मरीज सिर्फ सर्जरी कराने के बाद इसका पूरा इलाज नहीं लेते हैं जिसके कारण कैंसर का पूरा खात्मा नहीं हो पाता हैऔर कैंसर के वापिस आने का डर बना रहता हैं | इसीलिए आवश्यक है कि ब्रेस्ट कैंसर का पूरा इलाज करवाना चाहिए। नई सर्जिकल तकनीकों से सर्जरी के परिणाम बहुत बेहतर हो गए हैं।
नई तकनीक से सर्जरी हो तो खराब नहीं होगी बॉडी शेप : डॉ. अनुकृति सूद ने बताया कि आमतौर पर मरीजों को यह डर रहता है कि कैंसर की सर्जरी कराने के बाद उनके प्रभावित अंग का आकार बिगड़ जाएगा। लेकिन ब्रेस्ट में कैंसर टयूमर छोटा हो तो ब्रेस्ट कंजर्वेशन सर्जरी की जा सकती है जिसमें सिर्फ गांठ और आस-पास का प्रभावित हिस्सा निकाल दिया जाता है। वहीं ब्रेस्ट ऑन्कोप्लास्टिक सर्जरी भी होने लगी है जिसमें गांठ निकालने के बाद जो डिफेक्ट बन जाता है उसे टिश्यू को री-अरेंज करके दोबारा सामान्य बना दिया जाता है।
ब्रेस्ट कैंसर के लक्षण : स्तन में गाँठ होना, स्तन के आकर में परिवर्तन आना, निप्पल से खून आना एवं स्तन की चमड़ी या निप्पल का अंदर की तरफ धस जाना।
आम तौर पर स्तन कैंसर में दर्द नहीं होता है तो महिलाओं को किसी भी गाँठ के होने पर तुरंत ब्रैस्ट स्पैशलिस्ट (स्तन विषेशज्ञ) से संपर्क करना चाहिए, दर्द न होने पर उसमें लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए |
फ़ॉलोअप (Followup) – पूरा उपचार होने के बाद महिला को हर तीन या छ: महीने में ब्रैस्ट स्पैशलिस्ट (स्तन विषेशज्ञ) को निरंतर रूप से दिखाते रहना चाहिए, इससे बीमारी के वापिस आकर (recurrence) फैल जाने की संभावना कम हो जाती हैं और हम recurrent कैंसर को जल्दी डायग्नोज़ कर पाते है |













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