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माधव चाहता है राष्‍ट्रीय स्‍तर की फुटबॉल चैम्पियनशिप जीतना

दुनिया में फुटबॉल के सबसे बड़े आयोजन ने हाल ही में सभी पर फुटबॉल का जादू चलाया था और भारत के होनहार भी भविष्‍य में हमारे देश का प्रतिनिधित्‍व करने के लिये इस खेल में महारथ पाने की होड़ कर रहे थे। जयपुर, राजस्‍थान के 16 साल के बायजूस स्‍टूडेंट माधव हर्ष खुद को फुटबॉल के मैदान पर जमा रहे हैं और उन्‍होंने राज्‍य तथा जिला स्‍तर की प्रतियोगिताओं में कई पुरस्‍कार जीतकर अपने राज्‍य को एक खास पहचान दिलाई है।

माधव ने महज 12 साल की उम्र से फुटबॉल खेलना शुरू किया था और फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। बीतते समय के साथ उनकी लगन ने समर्पण का रूप ले लिया, उन्‍होंने कठोर अभ्‍यास किया और पढ़ाई भी जारी रखी। वह अब एसजीएफआई नेशनल टूर्नामेंट खेलने पर नजर गड़ाए हुए हैं, ताकि अपने राज्‍य और माता-पिता को उनकी उपलब्धियों पर गर्व हो। इस खेल में कई पुरस्‍कार जीतने के अलावा उन्‍हें रिलायंस फाउंडेशन यूथ स्‍पोर्ट्स द्वारा आयोजित एक टूर्नामेंट में ‘प्‍लेयर ऑफ द मैच’ की उपाधि भी मिल चुकी है।

माधव पढ़ाई के लिये एक साथी की जरूरत को समझते हैं, जोकि पढ़ाई से समझौता किये बिना खेल को वक्‍त देने में उनकी मदद कर सके। यह सुनिश्चित करने के लिये उनके पैरेंट्स ने उन्‍हें बायजूस में एनरोल किया था, जो कि उनके मुताबिक उनके बेटे की जिन्‍दगी और इंजीनियरिंग करने की उसकी भविष्‍य की योजना के लिये काफी अच्‍छा है। उनका मानना है कि बायजूस से माधव को कॉन्‍सेप्‍ट समझने में स्‍पष्‍ट तौर पर सहायता मिल रही है और सबसे महत्‍वपूर्ण, फुटबॉल और पढ़ाई के बीच अपने टाइम को सही तरीके से बैलेंस कर रहे हैं।

इस बारे में माधव ने कहा, “मैंने बहुत छोटी उम्र से फुटबॉल खेलना शुरू किया था और मुझे लगा कि फुटबॉल ने मुझे बेहतर सीखने वाला बनाया है। हालांकि अपनी दोनों प्राथमिकताओं को संतुलित रखने के लिये मुझे ऐसा समाधान चाहिये था, जो मुझे मेरी गति से पढ़ने दे। यहाँ बेहतर पढ़ाई में बायजूस मेरी मदद कर रहा है, खासकर भौतिकी, रसायन और गणित जैसे विषयों में, जिनमें कॉन्‍सेप्‍ट्स की सही समझ चाहिये होती है। एनिमेशन वाले इंटरैक्टिव वीडियोज और टीचर्स के मुझ पर निजी रूप से ध्‍यान देने के साथ, मैं परीक्षाओं में बेहतर प्रदर्शन कर रहा हूँ और सबसे महत्‍वपूर्ण, मैं सारे प्रैक्टिस सेशंस में जाता हूँ और प्रतियोगिताओं में भाग लेता हूँ, यह चिंता किये बिना कि मैं स्‍कूल में पिछड़ जाऊंगा।”

बायजूस के चीफ कंटेन्‍ट ऑफिसर विनय एमआर ने कहा, “पाठ्यक्रम की अभिनव आपूर्ति और पढ़ाने की अनूठी विधियों के माध्‍यम से हम विद्यार्थियों के शैक्षणिक और पढ़ाई से इतर लक्ष्‍यों को संतुलित रखने में उनकी सहायता करते हुए अपनी लगन पर ध्‍यान देने के लिये उन्‍हें सशक्‍त करने की आशा करते हैं। कंटेन्‍ट को निजीकृत बनाने से बच्‍चे अपनी रूचि के दूसरे क्षेत्रों में भी काम कर सकते हैं, जोकि चरित्र और विकास की सोच के निर्माण में महत्‍वपूर्ण होते हैं। माधव जैसी कहानियाँ हमें ज्‍यादा नवाचार करने के लिये प्रेरित करती हैं, ताकि हम पढ़ाई को बच्‍चों के लिये ज्‍यादा रोचक और सुखद बना सकें। मैं माधव को उनकी भविष्‍य की कोशिशों के लिये शुभकामनायें देता हूँ।”

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