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प्रोटीन शरीर-निर्माण का महत्वपूर्ण घटक

प्रोटीन एक माईक्रोन्यूट्रिएंट है जो शरीर के वृद्धि और मरम्मत के लिए बहुत ज़रूरी है यह हमारे प्रतिदिन के संतुलित आहार का महत्वपूर्ण हिस्सा है।प्रोटीन संपूर्ण शरीर के संचालन जैसे रोग-प्रतिरोधक शक्ति का विकास,हार्मोंस के उत्पादन,एंग्ज़ाईम्स और हिमोग्लोबिन को बनाने के लिए आवश्यक है। बढते हुए शरीर के कारण बच्चों को प्रोटीन की ज़रूरत अधिक होती है क्योंकि प्रोटीन द्वारा ही शरीर की वृद्धि होती है। साथ ही रोग प्रतिरोध क्षमता का विकास और विविध प्रकार के संक्रमणों से बचाव भी प्रोटीन के द्वारा ही संभव है।शरीर की बढवार के साथ प्रोटीन को अन्य काम भी करने पडते हैं क्योंकि प्रत्येक कोशिका के मूल में प्रोटीन है। मांसपेशियों को अधिक शक्ति देना,रोगों की रोकथाम करना और शरीर के भार को नियंत्रित करना आदि काम भी प्रोटीन ही करता है। उम्र बढने के साथ प्रोटीन और अधिक ज़रूरी हो जाता है। प्रोटीन ही हमें संक्रमणों से बचाता है साथ ही बीमारी से शीघ्रता से उबरने में सहायक होता है।

इंडियन मार्केट सिसर्च ब्यूरो द्वारा हाल ही में किए गए सर्वेक्षण में भारत में प्रोटीन की कमी और जागरूकता के बारे में यह पता लगाया गया है कि 73% शहरी लोग प्रोटीन की कमी से पीडित हैं। उमनें 93% लोग इस बात से अनभिज्ञ हैं कि उन्हें प्रतिदिन की कितने प्रोटीन आवश्यकता है और वे उस प्रोटीन को भोजन में कैसे लें और प्रोटीन की ज़रूरत कैसे पूरी कर सकते हैं ।

एनआईएन आईसीएमआर 2020 के अनुसार प्रोटीन का आरडीए अर्थात प्रतिदिन की ज़रुरत  स्त्रियों और पुरुषों के संदर्भ में क्रमश: 46 ग्राम और  54 ग्राम है।उत्तर भारत इस प्रोटीन की आवश्यकता का केवल 50% ही पूरा कर पाता है। उत्तर और दक्षिण भारत दोनों में यह देखा गया है प्रोटीन को दालों और अनाज जैसे बहुत ही नगण्य स्रोतों से प्राप्त किया जाता है।एशियन और भारतीयों के द्वारा जो आहार लिया जाता है उसमें कार्बोहाईड्रेट ,वसा और शुगर अधिक होता है प्रोटीन कम।कुल मिलाकर जिसका असर शरीर में कम घनत्व की माँसपेशियाँ और रोग प्रतिरोधक क्षमता का कम होना है।

एनआईएन-आईसीएमआर की एक रिपोर्ट के अनुसार, (जो ’भारत क्या खाता है?’(2020)) पर आधारित है)-मध्य भारत में प्रोटीन का उपभोग सबसे अधिक ,लगभग 48.6 ग्राम प्रतिदिन है। उसके बाद उत्तर-पूर्व (41.2 ग्राम प्रतिदिन) है। उत्तर भारत में प्रोटीन का उपभोग सबसे कम यानी 21.8 ग्राम प्रतिदिन है।सभी भोजन समूहों ,चाहे वह शहरी हो जो 26.8 ग्राम प्रतिदिन प्रोटीन लेता है या ग्रामीण 33.4 ग्राम प्रतिदिन प्रोटीन ग्रहण करता है–दोनों के बीच अनाज और बाजरा प्रोटीन की आपूर्ति मं सबसे मुख्य भूमिका निभाते हैं। अगला भोजन समूह जिसमें प्रोटीन का स्रोत, दालें और फलियाँ जैसे मटर तथा सेम आदि हैं।

यह 8.2 ग्राम प्रतिदिन प्रोटीन प्रदान करते हैं तथा शहरी भारत के आहार समूहों के बीच कुल प्रोटीन का 14.8 ग्राम पूर्ति करता है।माँस,पोल्ट्री,मछली और समुद्री भोज्य पदार्थॉं का कुल योगदान 11.6% है जिनमें 2.2 मध्य भारत और 16. 9% दक्षिणी भरत में है।दक्षिणी भाग में माँस द्वारा प्राप्त किए जाने प्रोटीन का बडा हिस्सा है। इस कारण यह ज़रूरी है कि प्रोटीन के संदर्भ में यह जागरूकता फैलाई जाए कि हमारे स्वास्थ्य के लिए यह कितना महत्वपूर्ण है तथा प्रोटीन के स्रोतों को कैसे अपने आहार में शामिल किया जाए। जैव उपलब्धता के आधार पर प्रोटीन की गुणवता-उसके एमिनो और प्रोफाईल जानी जा सकती है। पोल्ट्री उत्पाद जैसे चिकन,बत्तख,टर्की और अंडे जैव उपलब्ध प्रोटीन के श्रेष्ठ एवम संपूर्ण साधन हैं क्योंकि इनमें सभी आवश्यक एमिनो एसिड होते हैं। प्रोटीन के संपूर्ण स्रोत जैसे चिकन,टर्की, बत्तख और अँडे शत-प्रतिशत पचने वाले आहार हैं।ये सब स्वस्थ प्रोटीन की विशेषताओं जैसे वसा और माईक्रोन्यूट्रीएंट से भरपूर हैं। इनका उच्च प्रोटीन इन्हें  रोग-प्रतिरोध क्षमता बढाने का बडा साधन बनाता है। ये न केवल प्रोटीन अपितु विटामिन ए,विटामिन बी-12 ज़िंक,लौह,एवम सेलेनियम के भी स्रोत हैं।