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खराब एयर क़्वालिटी  के कारण बढ़ रहे सीओपीडी के मामले

देश में तेजी से बढ़ते वायु प्रदूषण के कारण फेफड़ों की गंभीर बीमारी क्रॉनिक ऑबस्ट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी) के मामलों में बढ़ोत्तरी देखने को मिल रही है। देश में होने वाले सीओपीडी के मामलों में 59.4 प्रतिशत केस वायु प्रदूषण के कारण हो रहे हैं। वहीं इसके बाद स्मोकिंग, सीओपीडी का सबसे बड़ा कारण है। करीब 21 प्रतिशत मामलों में स्मोकिंग कारण है। हर साल नवंबर माह में विश्व क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज डे मनाया जाता है। इस साल विशेष दिवस की थीम “जीवन के लिए आपके फेफड़े” है। वर्ल्ड सीओपीडी डे के मौके पर रुकमणी बिरला हॉस्पिटल के सीनियर पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. राकेश गोदारा ने इस बीमारी के बारे में जानकारी दी।

क्या है सीओपीडी?

डॉ.  राकेश गोदारा ने बताया कि क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज, जिसे आमतौर पर सीओपीडी के नाम से जाना जाता है। ये फेफड़ों की प्रोग्रेसिव डिजीज का एक समूह है। इसमें मरीज़ को लगतार खाँसी, खाँसी के साथ बलगम बनना, साँस फूलना इत्यादि लक्षण होते है। समय पर रोग की पहचान, उचित जाँच व उपचार के साथ एक व्यक्ति लक्षणों को कंट्रोल कर सकता है, अन्य संबंधित बीमारियों के जोखिम को कम कर सकता है और एक गुणवत्तापूर्ण जीवन भी जी सकता है।

धूम्रपान और प्रदूषण है बड़ा कारण

सीओपीडी रोग का सबसे बड़ा कारण धूम्रपान व वायु प्रदूषण है। वहीं, जिन गांव-घरों में आज भी चूल्हे पर खाना पकता है, वहां की ज्यादातर महिलाएं सीओपीडी की शिकार हैं। सीओपीडी के लक्षण 35- 40 साल की उम्र के बाद ही नजर आते हैं। लक्षण होने पर मरीज़ को लम्बे समय तक दवाई लेनी पड़ती है,  ऐसे में मरीज चिकित्सक की सलाह के बिना दवा बंद न करें।

सीओपीडी के जोखिम को यूं कम करें –

कुछ सावधानियों का ध्यान रखकर सीओपीडी के जोखिम को कम किया जा सकता है। डॉ. गोदारा ने बताया कि अगर आप धूम्रपान करने वाले हैं तो धूम्रपान बंद कर दें, अन्यथा आपको गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। सेकेंड हैंड धुएं के संपर्क में आने से बचें। हानिकारक गैसों या रसायनों के संपर्क में आने से बचें। अगर आपके क्षेत्र में गंभीर वायु प्रदूषण है तो मास्क पहनें। फेफड़ों के अनुकूल योगाभ्यास करें।

सीओपीडी का उपचार –

सांस लेने के लिए उपयोग की जाने वाली मांसपेशियों को मजबूत करने के लिए एक विशेष व्यायाम मदद कर सकता है। हालांकि, गंभीर मामलों में फेफड़े की ट्रांसप्लांट सर्जरी की सलाह भी दी जा सकती है। डॉ. गोदारा  ने कहा कि सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि खुद दवा लेने से बचें और केवल डॉक्टर द्वारा निर्धारित दवाएं लें। इसके अलावा, अपने चिकित्सक द्वारा बताए अनुसार नियमित रूप से इनहेलर लें। चूँकि सीओपीडी के फ़्लेयर अप (एकजाजेरबेशन) में संक्रमण मुख्य कारण है इसलिए उनसे बचाव के लिए न्यूमोनिया एवं इनफ़्लुएंज़ा की वैक्सीन काफ़ी कारगर है। पल्मोनरी रिहेबीलिटेशन के माध्यम से एक्सरसाईज़ एवं खान- पान का ध्यान रख कर इंहलेर्स  के साथ जीवनशैली को बेहतर बनाया जा सकता है।