आमतौर पर गर्दन के आस-पास बनने वाला थायरॉयड ट्यूमर उस समय मरीज के लिए जानलेवा बन गया जब वह छाती तक पहुंच गया और सांस की नली को दबाने लग गया। लेकिन शहर के रुकमणी बिरला हॉस्पिटल के डॉक्टर्स मरीज के लिए नई आशा बनकर उभरे। डॉक्टर्स ने जटिल सर्जरी कर मरीज की आवाज की नसों, सांस की नली को बचाते हुए ट्यूमर निकाला और उसकी जान बचा ली। हॉस्पिटल के सीनियर ईएनटी सर्जन डॉ. अमित नाहटा ने यह सफल सर्जरी की।
लेटते ही बंद हो जाती थी सांस — डॉ. अमित नाहटा ने बताया कि 55 वर्षीय मरीज को थायरॉयड ट्यूमर की समस्या थी। यह ट्यूमर किसी कारणवश छाती तक आ गया था और सांस की नली को दबाने लग गया था। ट्यूमर से गर्दन भी टाइट हो गई थी जिसके कारण सभी नसें चेहरे की तरफ फूल गई थीं। मरीज लेट भी नहीं पा रहे थे क्योंकि लेटते ट्यूमर सांस की नली में घुस रहा था जिससे उनकी सांस बंद हो जाती थी। कुछ समय तक ऐसी स्थिति रहती तो मरीज की जान भी जा सकती थी। ऐसे में हमने तुरंत सर्जरी करने का निर्णय लिया।
सर्जरी में थे कई जोखिम — रीज की सर्जरी में बहुत जोखिम थे। डॉ. अमित ने बताया कि ट्यूमर हार्ट की मुख्य नसों तक पहुंच गया था और उसे निकालने में नसों को नुकसान होना, छाती खोलने और सांस की नली को भी नुकसान होने का खतरा था जिसके कारण मरीज को जीवनभर सांस की ट्यूब के सहारे रहना पड़ सकता था। मरीज का कैल्शियम मैटाबॉलिज्म भी हमेशा के लिए खराब हो सकता था।
बिना छाती खोले निकाला ट्यूमर — मरीज की बिना छाती खोले सर्जरी कर दी गई। डॉ. अमित नाहटा ने बताया कि हमने गर्दन के रास्ते से ही बिना छाती तक पहुंच कर ट्यूमर निकाल लिया। इस दौरान न तो अधिक रक्तस्राव हुआ और मरीज की बोलने की नसों को भी बचा लिया गया। सर्जरी के बाद सांस की नली कोमल हो जाती है जिससे उनके फटने का डर भी था। इसे मैनेज करते हुए मरीज की सफल सर्जरी की गई, साथ ही मरीज की आवाज भी प्रभावित नहीं हुई। सर्जरी में एनेस्थिसिया विशेषज्ञ डॉ. अतुल पुरोहित और उनकी टीम का विशेष सहयोग रहा। मरीज को एक दिन के लिए आईसीयू में रखकर अगले दिन वॉर्ड में शिफ्ट कर दिया गया और चार दिन बाद ही उन्हें अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया।












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