पीपुल्स ऑर्गनाइजेशंस ऑन लेप्रोसी के दूसरे ग्लोबल फोरम का आयोजन हाल ही मे हैदराबाद में किया गया। लेप्रोसी यानी कुष्ठ रोग को हैनसेन्स डिजीज भी कहा जाता है। इस अयोजन में 20 देशों के 21 संगठनों के करीब 100 प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। फोरम की थीम रखी गई थी, ‘कुष्ठ पीड़ित लोगों को सम्मानित जीवन जीने में सक्षम बनाने में जन संगठनों की भूमिका एवं क्षमता को मजबूती देना एवं बढ़ाना।’मिस वर्ल्ड ब्राजील लेटिसिया केजार डा फ्रोटा और मिस सुप्रनेशनल इंडिया प्रज्ञा अयागरी ने भी इस तीन दिवसीय फोरम में हिस्सा लिया। कुष्ठ उन्मूलन के लिए डब्ल्यूएचओ के गुडविल एंबेसडर श्री योहेई सासाकावा ने भी कार्यक्रम में हिस्सा लिया। श्री योहेई सासाकावा ने निप्पोन फाउंडेशन और सासाकावा हेल्थ फाउंडेशन के साथ मिलकर रणनीतिक गठजोड़ किया है, जिसे सासाकावा लेप्रोसी (हैनसेन्स डिजीज) इनीशिएटिव के नाम से जाना जाता है।
इस तीन दिवसीय आयोजन में जन संगठनों की क्षमता बढ़ाने, समावेश बढ़ाने और उनकी आपसी साझेदारी को लेकर विभिन्न सत्र आयोजित किए गए। फोरम का आयोजन सासाकावा लेप्रोसी (हैसनेन्स डिजीज) इनीशिएटिव ने कोविड-19 महामारी के दौरान शुरू किए गए अपने अभियान ‘डोंट फॉरगेट लेप्रोसी’ (कुष्ठ को नजरअंदाज न करें) के तहत किया।
फोरम के आखिरी दिन अपने संबोधन में कुष्ठ उन्मूलन को लेकर डब्ल्यूएचओ के गुडविल एंबेसडर श्री योहेई सासाकावा ने कहा,‘कुछ समय पहले तक कुष्ठ से पीड़ित लोगों के लिए अपने अधिकारों की बात करना बहुत मुश्किल था। यह देखना बहुत सुखद लग रहा है कि दुनियाभर से इस दिशा में कार्यरत जन संगठनों के प्रतिनिधियों ने साथ मिलकर इस दूसरे ग्लोबल फोरम का आयोजन किया। ये सब एक-दूसरे के साथ हैं और साथ मिलकर आवाज उठा रहे हैं। मुझे उम्मीद है कि सभी प्रतिनिधि यहां से वापस जाकर अपने सहयोगियों को इस बारे में बताएंगे और नई संभावनाएं सामने आएंगी। इससे कुष्ठ से पीड़ित सभी लोगों के जीवन में सुधार होगा। इस तरह का अभियान वास्तव में शानदार है।’
बदलाव की बात करते हुए मिस सुप्रनेशनल इंडिया 2023 प्रज्ञा अयागरी ने कहा,‘इस कार्यक्रम में आने से पहले तक मुझे कुष्ठ के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। अब मुझे लग रहा है कि इस मुद्दे के बारे में बच्चों और युवाओं को जानकारी होनी चाहिए। इससे निश्चित तौर पर इस बीमारी को लेकर उनकी सोच में बदलाव आएगा। मैं इस कार्यक्रम से बहुत सी अच्छी बातें सीखकर जा रही हूं और जीवनभर यह सीख मेरे काम आएगी।’प्रज्ञा अयागरी हैदराबाद से ही हैं।
एसोसिएशन ऑफ पीपुल अफेक्टेड बाय लेप्रोसी (एपीएएल) की प्रेसिडेंट माया रानावरे ने भारत में कुष्ठ पीड़ितों के प्रतिनिधि के रूप में अपने विचार रखे। उन्होंने सासाकावा हेल्थ फाउंडेशन जैसे संगठनों द्वारा इस बीमारी के बारे में जागरूकता के प्रयासों से दुनिया में बदल रही स्थिति के बारे में बात की। उन्होंने कहा, ‘इस फोरम के रिजॉल्यूशन को मैं 21वें इंटरनेशनल लेप्रोसी कॉन्फ्रेंस में रखूंगी। मैं उन बहुत से लोगों की आवाज हूं जिन्होंने छूआछूत और भेदभाव का सामना किया है। आभारी हूं कि अब यह स्थिति धीरे-धीरे बदल रही है।’कार्यक्रम के दौरान आईडिया घाना के श्री कोफी न्यारको और मोरहैम, ब्राजील के श्री फॉस्टिनो पिंटो ने भी माया रानावरे की बात का समर्थन किया।
कोविड-19 महामारी के कारण कुष्ठ पीड़ितों के लिए मुश्किल में बीते पिछले करीब तीन साल को देखते हुए फोरम ने इन संगठनों को सशक्त करने पर फोकस किया है, जिससे वे कुष्ठ पीड़ितों के समक्ष आने वाली चुनौतियों से ज्यादा बेहतर तरीके से निपटने में सक्षम हों। इनमें से कई संगठनअगस्त, 2021 में लॉन्च किए गए डोंट फॉरगेट लेप्रोसी अभियान में सक्रिय रहे हैं। डब्ल्यूएचओ के गुडविल एंबेसडर के नेतृत्व में इस अभियान ने महामारी के जटिल दौर में कुष्ठ पीड़ितों की सहायता के लिए उचित कदम उठाया जाना सुनिश्चित किया।
कार्यक्रम के दौरान क्षमता निर्माण, बेहतर साझेदारी बनाने और समावेश को बढ़ावा देने को लेकर सत्र आयोजित किए गए, जिसमें सभी ने उन कदमों को एक-दूसरे से साझा किया, जिनके अच्छे नतीजे मिले हैं। आखिरी दिन कई अन्य आयोजन भी किए गए। 20 देशों से 21 संगठनों के करीब 100 प्रतिनिधियों ने इसमें हिस्सा लिया। साथ ही यूएन की विशेषज्ञ एलिस क्रूज ने भी इसमें हिस्सा लिया।
इस मौके पर मिस वर्ल्ड ब्राजील 2022 लेटिसिया सेजार डा फ्रोटा ने कहा, ‘इस कार्यक्रम में आकर मैं बहुत प्रेरित अनुभव कर रही हूं। ब्राजील वापस जाकर मैं कुष्ठ पीड़ितों के लिए समय दूंगी। मिस सुप्रनेशनल इंडिया के साथ मिलकर मैं दुनियाभर में कुष्ठ के बारे में जागरूकता लाना चाहती हूं।’












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