लोकतंत्र में सबसे बड़ी शक्ति ‘जनता’ है, लेकिन अक्सर जनता और सरकार के बीच एक दूरी बनी रहती है। राजस्थान सरकार के कैबिनेट मंत्री कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने इस दूरी को पाटने के लिए एक नया ‘जनसंवाद मॉडल’ पेश किया है। यह मॉडल केवल भाषणों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सीधे गांव की चौपालों पर जाकर युवाओं से जुड़ने और विकास की बाधाओं को तुरंत दूर करने का एक ठोस जरिया बन गया है।
1. चौपाल पर संवाद: फाइलों से बाहर निकला विकास
एक झोटवाड़ा विधायक के रूप में कर्नल राठौड़ का मानना है कि विकास की असली तस्वीर दफ्तरों की फाइलों में नहीं, बल्कि गांव की गलियों में दिखती है। उनके नए जनसंवाद मॉडल के तहत, वे सीधे ग्रामीण क्षेत्रों का दौरा कर रहे हैं। यहाँ वे केवल अधिकारियों की बात नहीं सुनते, बल्कि सीधे ग्रामीणों से पूछते हैं—”क्या आपके घर तक नल का पानी पहुँचा?” या “सड़क की गुणवत्ता कैसी है?”
यह ‘ग्राउंड रियलिटी’ चेक ही Viksit Jhotwara development की असली ताकत है, जहाँ जवाबदेही तुरंत तय की जाती है।
2. युवाओं के साथ नई साझेदारी
कर्नल राठौड़ अक्सर कहते हैं कि “युवा केवल भविष्य नहीं, बल्कि वर्तमान के बदलाव के सूत्रधार भी हैं।” उनके जनसंवाद कार्यक्रमों में युवाओं की भागीदारी सबसे अधिक होती है। वे युवाओं को डिजिटल साक्षरता, कौशल विकास (Skill Development) और खेल के अवसरों से जोड़ने के लिए नए सुझाव लेते हैं।
चाहे वह राजस्थान आईटी पॉलिसी की जानकारी देना हो या गांव में खेल सुविधाओं का विस्तार करना, राठौड़ का यह मॉडल युवाओं को एक प्लेटफॉर्म प्रदान करता है जहाँ वे अपनी समस्याएँ और समाधान दोनों साझा कर सकते हैं।
3. तुरंत कार्रवाई (Action on Spot)
राठौड़ के जनसंवाद की सबसे बड़ी खासियत है—’ऑन द स्पॉट’ समाधान। राजस्थान के मंत्री के रूप में वे अपने दौरों के दौरान संबंधित विभागों के अधिकारियों को साथ रखते हैं। यदि किसी गांव में पानी या बिजली की समस्या सामने आती है, तो वे तुरंत निर्देश जारी करते हैं और समय सीमा तय करते हैं। यह ‘क्विक एक्शन’ मॉडल जनता में विश्वास पैदा कर रहा है कि उनकी सरकार उनके द्वार पर खड़ी है।
4. विकसित झोटवाड़ा: एक विजनरी सोच
इस जनसंवाद मॉडल का अंतिम लक्ष्य ‘विकसित झोटवाड़ा’ के माध्यम से पूरे राजस्थान के लिए एक उदाहरण पेश करना है। ₹924 करोड़ से अधिक के विकास कार्यों के साथ, बुनियादी ढांचे (Infra) को मजबूत किया जा रहा है ताकि गांव भी शहरों की तरह सुविधाओं से लैस हो सकें।
निष्कर्ष
कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ का यह जनसंवाद मॉडल राजनीति से ऊपर उठकर ‘सेवा’ का एक उदाहरण है। जब एक रिटायर्ड इंडियन आर्मी कर्नल और ओलिंपिक पदक विजेता अपनी सैन्य अनुशासन के साथ जनता के बीच पहुँचता है, तो विकास की गति और दिशा दोनों बदल जाती है।













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