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आर्य समाज में पहली बार वैदिक शिक्षाओं का प्रसार

आर्य समाज के संस्‍थापकमहर्षि दयानंद सरस्‍वती की 200वीं जयंती वर्ष के उपलक्ष्‍य मेंगुजरात के राज्‍यपाल म‍हामहिम श्री आचार्य देवव्रत ने नवलखा महल परिसर में तीन नव-निर्मित खंडों का आज लोकार्पण किया। इस अवसर पर उपस्थित अन्‍य गणमान्‍य जनों में जेबीएम ग्रुप के चेयरमैन श्री एस के आर्याश्रीमद दयानंद सत्‍यार्थ प्रकाश ट्रस्‍ट के अध्‍यक्ष श्री अशोक आर्या आदि शामिल थे।

यहां विस्‍तृत क्षेत्र में फैले गुलाब बाग में स्थित नवलखा महल को 1992 में राजस्‍थान सरकार ने एक स्‍मारक के निर्माण के लिए आर्य समाज को सौंपा था। यही वह स्‍थान है जहां महर्षि दयानंद सरस्‍वती ने अपने जीवन के छह महत्‍वपूर्ण माह बिताए थे और इस दौरानअपने महत्‍वपूर्ण ग्रंथ सत्‍यार्थ प्रकाश’ का लेखन-कार्य किया था।

आज नवलखा महल में आयोजित लोकार्पण समारोह से पूर्व प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने महर्षि दयानंद सरस्‍वती की 200वीं जयंती वर्ष तथा आर्य समाज के 150वें स्‍थापना वर्ष के अवसर पर आयोजित किए जा रहे कार्यक्रमों का भी शुभारंभ किया था। ये समारोह 10 अप्रैल, 2025तक जारी रहेंगे।

इस अवसर पर, श्री एस के आर्य, चेयरमैन, जेबीएम ग्रुप ने कहा, ”नवलखा भवन वास्‍तुशिल्‍प की दृष्टि से भव्‍य स्‍थल है और यहां अब विश्‍व में पहली बार वैदिक उद्धरणों/परिच्‍छेदों को दृश्‍य रूप में प्रदर्शित किया गया हैताकि आम जनता के लिए वेदों में निहित संदेशों एवं शिक्षाओं को समझना आसान हो। यहां भगवान राम और कृष्‍ण के जीवन तथा साधुओं एवं संतों की जीवन-गाथाओं को भी भव्‍य तैल-चित्रों में प्रदर्शित किया गया है।”

श्रीमद दयानंद सत्‍यार्थ प्रकाश ट्रस्‍ट के अध्‍यक्ष श्री अशोक आर्या ने 365 स्‍वतंत्रता सेनानियों के जीवन को प्रदर्शित करने वाली दीर्घा के बारे में जानकारी देते हुए बताया, ”ये सभी सेनानी भारत के अलग-अलग भागों से थेकोई महाराष्‍ट्र से तो कोई बंगालओडिशाअसम और पंजाब से था। हमने इन अनाम सेनानियों के जीवन और देश के स्‍वतंत्रता-संग्राम में उनके नि:स्‍वार्थ योगदान को यहां प्रदर्शित किया है।”

श्रीमद दयानंद सत्‍यार्थ प्रकाश ट्रस्‍ट ने 150 वर्ष पुराने नवलखा महल को एक संग्रहालय एवं प्रेरक केंद्र में बदलने में अग्रणी भूमिका निभायी।

इसके जीर्णाद्वार कार्य के दौरानकुछ नई परियोजनाओं जैसे कि एक मिनी थियेटरएक सांस्‍कृतिक दीर्घा और एक प्रेरक स्‍थल का भी निर्माण किया गया। सभी बाहरी दीवारों पर आकर्षक चित्रों को उकेरा गया है जो आज हर देखने वाले को सुखद अनुभव प्रदान करते हैं। साथ हीमहर्षि अग्निवायुआदित्‍य एवं अंगिरा ऋषि की आदमकद प्रतिमाओं को भी नवलखा महल परिसर में लगाया गया है।

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