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सजा नहीं सम्मान? राठौड़ ने बदला ट्रैफिक नियम का नजरिया?

क्या केवल चालान से सुधार संभव है?

सड़क पर नियम तोड़ने वालों को दंड देना जरूरी है, लेकिन क्या यही एकमात्र तरीका है?

राज्य में हाल की पहल में यह संदेश दिया गया कि जो लोग नियमों का पालन करते हैं, उन्हें भी पहचान और सम्मान मिलना चाहिए।

सम्मान आधारित मॉडल क्यों जरूरी?

  • सकारात्मक व्यवहार को प्रोत्साहन
  • युवाओं में जिम्मेदारी की भावना
  • पुलिस और नागरिक के बीच सहयोग

यह ट्रैफिक नियम सुधार का एक नया दृष्टिकोण है।

समाज पर असर

जब अच्छे ड्राइवरों को सराहा जाता है:

  • लोग प्रेरित होते हैं
  • दुर्घटनाओं में कमी आ सकती है
  • ट्रैफिक अनुशासन बढ़ता है

यह केवल नियम लागू करना नहीं, बल्कि सामाजिक सुधार है।

निष्कर्ष

सजा और सम्मान दोनों जरूरी हैं, लेकिन सकारात्मक प्रोत्साहन समाज में दीर्घकालिक बदलाव ला सकता है।

सभी वाहन चालकों को नियमों का पालन कर सुरक्षित सड़क संस्कृति का निर्माण करना चाहिए।