?????????
Business Featured

‘मुख्यमंत्री दुग्ध संबल योजना’ के तहत बढ़ाई गई सब्सिडी में समानता की मांग की

22 ज़िलों के 5000 गांवों में 170,000 से अधिक डेयरी किसानों ने राजस्थान सरकार द्वारा मुख्यमंत्री दुग्ध संबल योजना के तहत हाल ही में घोषित सब्सिडी के लाभार्थी समूह में उन्हें शामिल न किए जाने पर गंभीर रूप से निराशा व्यक्त की है। 1 अप्रैल 2022 से लागू हुई यह योजना डेयरी सहकारी समिति से जुड़े मात्र 5 लाख दुग्ध किसानों पर ही लागू होती है।

4 दुग्ध उत्पादक कंपनियों- पायस (जयपुर), उजाला (कोटा), आशा (उदयपुर) और सखी (अलवर) का प्रतिनिधित्व करने वाले किसानों ने राजस्थान के मुख्यमंत्री जी से मिलने के लिए समय मांगा है, ताकि वे मुख्यमंत्री जी से मिलकर योजना के लाभार्थियों के समान फायदों के लिए बात कर सकें तथा अपनी आजीविका पर इसके परिणामों के बारे में उन्हें अवगत करा सकें।

हाल ही में राजस्थान सरकार ने कृषि एवं पशुपालन के लिए पहला अलग बजट पेश किया। अपनी मुख्यमंत्री दुग्ध संबल योजना के तहत, सरकार ने राज्य डेयरी संघ से जुड़ी सहकारी समितियों को दुग्ध की आपूर्ति देने वाले किसानों के लिए सब्सिडी रु 2 प्रति लीटर से बढ़ाकर रु 5 प्रति लीटर कर दी। रु 550 करोड़ के बजट के प्रावधान के साथ 5 लाख डेयरी किसानों को लाभान्वित करने के लिए इस सब्सिडी की घोषणा की गई है।  

श्रीमति रेखा माली, किसान सदस्य, आशा महिला दुग्ध उत्पादक कंपनी लिमिटेड, उदयपुर ने कहा, ‘‘हमारी कंपनी 100 फीसदी महिला स्वामित्व की कंपनी है, हममें से ज़्यादातर लोग डेयरी फार्मिंग पर निर्भर हैं। ऐसे में हमें लाभार्थी समूह से अलग रखना हमारे संगठन के विकास में रूकावट उत्पन्न करेगा, जिसका बुरा प्रभाव हमारे सदस्यों तथा उत्पादन पर पड़ेगा। सरकार हमेशा किसी चुनिंदा वर्ग के बजाए सभी लोगों के हितों को ध्यान में रखते हुए काम करती है और मुझे विश्वास है कि हमारे माननीय मुख्यमंत्री जी हमारी मांग पर ध्यान देंगे।’’

हाल ही में घोषित अनुदान से न सिर्फ डेयरी किसानों के बीच असमानता आएगी बल्कि राज्य के डेयरी तंत्र और दुग्ध उत्पादन में भी रूकावटें उत्पन्न होंगी। यह सब्सिडी गैर-लाभार्थी किसानों को हतोत्साहित कर सकती है और उन्हें उचित पारिश्रमिक न मिलने से उनकी आय के स्रोत कम होंगे और वे पशुपालन को छोड़ कर दूसरे व्यवसाय की ओर रुख कर सकते हैं, जिससे मांग एवं आपूर्ति के बीच अंतर की स्थिति उत्पन्न होगी।

यह उल्लेखनीय है कि कई राज्य अपनी ज़रूरतों के लिए राजस्थान के दुग्ध उत्पादन पर निर्भर करते हैं। ऐसे में इसका असर राज्य के राजस्व पर भी पड़ सकता है। साथ ही लाखों लोगों को रोज़गार देने वाले संबंधित उद्योगो पर भी इसका प्रभाव पड़ेगा।

यहां इस बात पर ध्यान देना भी ज़रूरी है कि 4 दुग्ध उत्पादक कंपनियां राज्य के डेयरी विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। अतः ये पीड़ित किसान माननीय मुख्यमंत्री जी से आग्रह  कर रहे हैं कि मुख्यमंत्री दुग्ध सम्बल योजना के तहत घोषित रु 5 प्रति लीटर की अनुदान राशि का लाभ इन दुग्ध उत्पादकों को भी मिलें।

About the author

admin

Add Comment

Click here to post a comment

Topics